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दिल्ली में ‘पिंक टिकट’ की विदाई तय! 8 लाख महिलाओं ने अपनाया स्मार्ट सफर, जुलाई से बसों में बदल सकता है पूरा सिस्टम

  नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली में महिलाओं और ट्रांसजेंडर यात्रियों के लिए शुरू की गई मुफ्त बस यात्रा योजना अब डिजिटल दौर में प्रवेश करती दिखा...

 



नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली में महिलाओं और ट्रांसजेंडर यात्रियों के लिए शुरू की गई मुफ्त बस यात्रा योजना अब डिजिटल दौर में प्रवेश करती दिखाई दे रही है। दिल्ली सरकार द्वारा शुरू किए गए ‘पिंक सहेली स्मार्ट कार्ड’ को लेकर लोगों में तेजी से उत्साह बढ़ रहा है। अब तक करीब 8 लाख महिलाएं यह कार्ड बनवा चुकी हैं। माना जा रहा है कि जुलाई 2026 से दिल्ली की डीटीसी और क्लस्टर बसों में लंबे समय से चल रही ‘पिंक टिकट’ व्यवस्था पूरी तरह खत्म हो सकती है और उसकी जगह स्मार्ट कार्ड आधारित सिस्टम लागू किया जा सकता है।

सरकार की इस पहल को सिर्फ मुफ्त यात्रा सुविधा नहीं, बल्कि महिलाओं के लिए सुरक्षित, सम्मानजनक और तकनीक आधारित सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था की दिशा में बड़ा बदलाव माना जा रहा है। नई व्यवस्था लागू होने के बाद महिलाओं को हर यात्रा में अलग से टिकट लेने की जरूरत नहीं पड़ेगी। बस में चढ़ते ही स्मार्ट कार्ड टैप कर यात्रा की जा सकेगी।

महिलाओं में बढ़ा भरोसा, कैंपों में उमड़ रही भीड़

दिल्ली सरकार ने कार्ड बनाने की प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए शहरभर में विशेष कैंप लगाए हैं। रिहायशी कॉलोनियों, सरकारी दफ्तरों और प्रमुख बस डिपो पर बड़ी संख्या में महिलाएं कार्ड बनवाने पहुंच रही हैं। सरकार का दावा है कि आने वाले हफ्तों में यह संख्या और तेजी से बढ़ेगी।

मुख्यमंत्री Rekha Gupta ने कहा कि सरकार का उद्देश्य सिर्फ मुफ्त यात्रा देना नहीं, बल्कि महिलाओं को आधुनिक और सुरक्षित परिवहन अनुभव उपलब्ध कराना है। उनके मुताबिक, “जब सार्वजनिक परिवहन सुलभ और सुरक्षित होता है तो महिलाओं के लिए शिक्षा, नौकरी और आत्मनिर्भरता के अवसर स्वतः बढ़ते हैं।”

सरकार इसे ‘विकसित दिल्ली’ अभियान का महत्वपूर्ण हिस्सा मान रही है।

58 सेंटरों पर मुफ्त बन रहा कार्ड

दिल्ली परिवहन निगम की ओर से राजधानी में 58 अधिकृत केंद्रों पर ‘पिंक सहेली स्मार्ट कार्ड’ नि:शुल्क बनाया जा रहा है। योजना के तहत 12 साल से अधिक उम्र की लड़कियां, महिलाएं और ट्रांसजेंडर यात्री आवेदन कर सकते हैं।

कार्ड बनवाने के लिए आधार कार्ड और उससे लिंक मोबाइल नंबर जरूरी रखा गया है। आवेदन प्रक्रिया पूरी होने के बाद लाभार्थी को स्मार्ट कार्ड जारी किया जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार, डिजिटल सत्यापन के जरिए फर्जीवाड़ा रोकने में भी मदद मिलेगी।

‘वन नेशन, वन कार्ड’ मॉडल से जुड़ी योजना

दिल्ली सरकार ने इस योजना की शुरुआत 2 मार्च 2026 को की थी। इसे केंद्र सरकार की ‘वन नेशन, वन कार्ड’ नीति के अनुरूप विकसित किया गया है। अभी तक महिलाओं को मुफ्त यात्रा के लिए पिंक पेपर टिकट दिया जाता था, लेकिन अब सरकार पूरी व्यवस्था को डिजिटल मोड में बदल रही है।

नई व्यवस्था लागू होने के बाद केवल दिल्ली की निवासी महिलाएं ही डीटीसी और क्लस्टर बसों में मुफ्त यात्रा का लाभ ले सकेंगी। सरकार का कहना है कि इससे वास्तविक लाभार्थियों की पहचान आसान होगी और परिवहन व्यवस्था अधिक पारदर्शी बनेगी।

बस ही नहीं, मेट्रो और नमो भारत ट्रेन में भी होगा इस्तेमाल

‘पिंक सहेली स्मार्ट कार्ड’ की सबसे बड़ी खासियत इसका मल्टी-यूज सिस्टम माना जा रहा है। सरकार के मुताबिक, यही कार्ड आगे चलकर दिल्ली मेट्रो, नमो भारत ट्रेन और दूसरी सार्वजनिक परिवहन सेवाओं में भी इस्तेमाल किया जा सकेगा।

हालांकि बस यात्रा महिलाओं के लिए मुफ्त रहेगी, लेकिन मेट्रो या अन्य सेवाओं के उपयोग के लिए कार्ड को रिचार्ज करना होगा। अधिकारियों का कहना है कि भविष्य में एकीकृत ट्रांसपोर्ट सिस्टम तैयार करने की दिशा में यह बड़ा कदम है।

इससे यात्रियों को अलग-अलग कार्ड और टिकट रखने की परेशानी से राहत मिलेगी। एक ही कार्ड से कई परिवहन सेवाओं का उपयोग संभव हो सकेगा।

जुलाई से बदल सकती है दिल्ली की बस यात्रा

सूत्रों के मुताबिक, यदि स्मार्ट कार्ड वितरण की रफ्तार इसी तरह जारी रही तो जुलाई 2026 से पिंक टिकट प्रणाली पूरी तरह समाप्त की जा सकती है। फिलहाल दोनों व्यवस्थाएं साथ-साथ चल रही हैं, ताकि यात्रियों को किसी तरह की असुविधा न हो।

परिवहन विभाग का मानना है कि डिजिटल टिकटिंग से बसों में नकदी और पेपर टिकट पर निर्भरता कम होगी। साथ ही यात्रा डेटा के जरिए महिलाओं की यात्रा पैटर्न का बेहतर विश्लेषण भी संभव हो सकेगा, जिससे भविष्य की परिवहन योजनाएं और प्रभावी बनाई जा सकेंगी।

दिल्ली में महिलाओं की मुफ्त बस यात्रा योजना पहले ही देशभर में चर्चा का विषय रही है। अब ‘पिंक सहेली स्मार्ट कार्ड’ के जरिए इसे तकनीक और डिजिटल सुविधा से जोड़ने की कोशिश की जा रही है। आने वाले महीनों में यह मॉडल दूसरे राज्यों के लिए भी उदाहरण बन सकता है।

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