भोपाल। मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में सरकारी मेडिकल कॉलेजों के जूनियर डॉक्टरों ने स्टाइपेंड बढ़ाने और लंबित भुगतान की मांग को लेकर प्रदर्शन...
भोपाल। मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में सरकारी मेडिकल कॉलेजों के जूनियर डॉक्टरों ने स्टाइपेंड बढ़ाने और लंबित भुगतान की मांग को लेकर प्रदर्शन किया। जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन (JUDA) के बैनर तले डॉक्टरों ने मार्च निकालकर सरकार के खिलाफ नाराजगी जताई। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि जल्द मांगें पूरी नहीं हुईं तो वे अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने को मजबूर होंगे।
जूनियर डॉक्टरों का कहना है कि प्रदेश सरकार ने अन्य कर्मचारियों के भत्ते और स्टाइपेंड में बढ़ोतरी की है, लेकिन रेजिडेंट डॉक्टरों के स्टाइपेंड में अब तक कोई बढ़ोतरी नहीं की गई है। इस संबंध में अधिकारियों को कई बार ज्ञापन दिया गया, लेकिन अब तक कोई ठोस जवाब नहीं मिला है।
2021 के आदेश के बावजूद नहीं बढ़ा स्टाइपेंड
डॉक्टरों के मुताबिक राज्य सरकार के 7 जून 2021 के आदेश के अनुसार 1 अप्रैल 2025 से स्टाइपेंड में CPE आधारित बढ़ोतरी और लंबित एरियर का भुगतान होना था। लेकिन अब तक न तो स्टाइपेंड बढ़ाया गया और न ही एरियर दिया गया है।
जूडा का कहना है कि इससे डॉक्टरों को आर्थिक परेशानी के साथ-साथ मानसिक दबाव का भी सामना करना पड़ रहा है, जिससे उनके मनोबल पर असर पड़ रहा है।
चरणबद्ध आंदोलन की चेतावनी
जूनियर डॉक्टरों ने चरणबद्ध आंदोलन की रणनीति अपनाई है। इसके तहत पहले काली पट्टी बांधकर विरोध, फिर प्रदर्शन मार्च और मांगें पूरी नहीं होने पर नॉन-इमरजेंसी सेवाओं का बहिष्कार किया जाएगा।
जूडा ने चेतावनी दी है कि सोमवार से वे ओपीडी और रूटीन चेकअप जैसी नॉन-इमरजेंसी सेवाएं बंद कर सकते हैं। हालांकि इस दौरान इमरजेंसी सेवाएं जारी रहेंगी, ताकि गंभीर मरीजों को परेशानी न हो।
यदि सरकार ने जल्द निर्णय नहीं लिया तो डॉक्टरों ने आंदोलन को और तेज करने की बात कही है, जिससे प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं पर असर पड़ सकता है।
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