वॉशिंगटन. अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि गुरुवार को ईरान पर ...
वॉशिंगटन. अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि गुरुवार को ईरान पर अब तक का “सबसे बड़ा हमला” किया जाएगा, जिसे उन्होंने ‘लार्जेस्ट स्ट्राइक पैकेज’ बताया।
हेगसेथ ने साफ कहा कि यह युद्ध अमेरिका की शर्तों पर ही खत्म होगा और अमेरिकी सेना अपने उद्देश्यों को हासिल करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि जंग की शुरुआत से अब तक अमेरिका के लक्ष्य नहीं बदले हैं और सभी ऑपरेशन तय रणनीति के तहत आगे बढ़ रहे हैं।
ब्रीफिंग के दौरान उन्होंने बताया कि हाल ही में युद्ध में मारे गए अमेरिकी सैनिकों के पार्थिव शरीर लाए गए, जहां उनके साथ राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी मौजूद थे। उन्होंने कहा कि शहीद सैनिकों के परिवारों ने अपील की है कि “जब तक मिशन पूरा न हो, तब तक कार्रवाई जारी रहे।”
अमेरिकी रक्षा मंत्री ने दावा किया कि ईरान की बैलिस्टिक मिसाइल क्षमता को गंभीर नुकसान पहुंचाया गया है। उन्होंने तंज करते हुए कहा कि ईरान की सेना Islamic Revolutionary Guard Corps (IRGC) में शीर्ष पद अब “अस्थायी” जैसे हो गए हैं, क्योंकि लगातार हमलों में बड़े कमांडर मारे जा रहे हैं।
हेगसेथ के मुताबिक, अब तक ईरान में 7,000 से ज्यादा लक्ष्यों पर हमले किए जा चुके हैं। इन हमलों का उद्देश्य मिसाइल लॉन्चरों को नष्ट करना, रक्षा ढांचे को कमजोर करना, नौसेना को निष्क्रिय करना और ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना है।
उन्होंने यह भी दावा किया कि अमेरिकी कार्रवाई के बाद ईरान की ओर से होने वाले बैलिस्टिक मिसाइल और ड्रोन हमले 90% तक घट गए हैं। साथ ही, अमेरिका ने कम से कम 120 ईरानी नौसैनिक जहाजों को नुकसान पहुंचाने या डुबोने का दावा किया है।
जंग के लिए 200 अरब डॉलर की मांग
इस बीच, अमेरिका ने ईरान के साथ जारी युद्ध के लिए 200 अरब डॉलर की अतिरिक्त फंडिंग की मांग की है। पेंटागन ने यह प्रस्ताव व्हाइट हाउस के जरिए कांग्रेस को भेजा है। यह राशि युद्ध खर्च, हथियारों की कमी को पूरा करने, म्यूनिशन प्रोडक्शन बढ़ाने और अतिरिक्त सैनिकों की तैनाती के लिए मांगी गई है।
हेगसेथ ने कहा कि अमेरिका की सैन्य क्षमता लगातार बढ़ रही है, जबकि ईरान की ताकत कमजोर पड़ती जा रही है। उन्होंने दावा किया कि पश्चिम एशिया का सुरक्षा परिदृश्य अब अमेरिका की रणनीति के अनुसार तय होगा।
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