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चैत्र नवरात्रि 2026: पूजा के साथ दान का भी है विशेष महत्व, जानिए क्यों कई गुना बढ़ जाता है पुण्य

  abernews. चैत्र नवरात्रि 2026 की शुरुआत 19 मार्च से होकर 27 मार्च तक रहेगी। सनातन परंपरा में मां दुर्गा को आदिशक्ति का स्वरूप माना गया है...

 


abernews. चैत्र नवरात्रि 2026 की शुरुआत 19 मार्च से होकर 27 मार्च तक रहेगी। सनातन परंपरा में मां दुर्गा को आदिशक्ति का स्वरूप माना गया है और इन नौ दिनों को साधना, उपासना और आत्मशुद्धि का विशेष समय बताया गया है। मान्यता है कि मां की कृपा से जीवन की बाधाएं दूर होती हैं और सुख-समृद्धि का मार्ग प्रशस्त होता है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नवरात्रि में केवल व्रत और पूजा ही नहीं, बल्कि दान-पुण्य का भी उतना ही महत्व है। सच्चे मन और निस्वार्थ भाव से किया गया दान कई गुना फलदायी माना जाता है। इससे जीवन के कष्ट कम होते हैं और घर में सुख-शांति बनी रहती है। शास्त्रों में दान हमेशा अपनी क्षमता के अनुसार और जरूरतमंद को करने की सलाह दी गई है। सुबह या दोपहर का समय दान के लिए शुभ माना जाता है, वहीं गुप्त दान को सबसे श्रेष्ठ बताया गया है।

नवरात्रि में किए जाने वाले प्रमुख दान

फल दान: मौसमी फल, खासकर केले दान करने से आर्थिक स्थिति मजबूत होने और धन संबंधी समस्याएं कम होने की मान्यता है।

खाद्य सामग्री और सफेद मिठाइयां: चावल, आटा, चीनी या सफेद मिठाइयों का दान सकारात्मक ऊर्जा बढ़ाने और नकारात्मकता दूर करने में सहायक माना जाता है।

कपड़ों का दान: जरूरतमंदों को नए कपड़े देने से उन्हें संतोष मिलता है और दान करने वाले को मानसिक शांति प्राप्त होती है।

गुड़ और चने का दान: गुड़ और चने का दान स्वास्थ्य और आत्मविश्वास में वृद्धि से जुड़ा माना जाता है।

लाल वस्तुओं का दान: सुहागिन महिलाओं को लाल चुनरी, साड़ी, चूड़ियां, सिंदूर या बिंदी देना शुभ माना जाता है, जिससे वैवाहिक जीवन में मधुरता और घर में खुशहाली आती है।

शिक्षा से जुड़ी वस्तुएं: कन्या पूजन के दौरान बच्चियों को भोजन कराने के साथ कॉपी, पेन, पेंसिल, ड्राइंग बुक या स्कूल बैग देना अत्यंत पुण्यदायक माना गया है। शास्त्रों में शिक्षा का दान सर्वोत्तम बताया गया है।

नवरात्रि का यह पावन पर्व न केवल भक्ति और साधना का अवसर है, बल्कि जरूरतमंदों की सहायता कर समाज में सकारात्मक बदलाव लाने का भी संदेश देता है।

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