रायपुर। छत्तीसगढ़ में शराब नीति को लेकर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं। छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने राज्य सरकार पर शराब बिक्र...
रायपुर। छत्तीसगढ़ में शराब नीति को लेकर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं। छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने राज्य सरकार पर शराब बिक्री के माध्यम से कमीशनखोरी और राजस्व बढ़ाने के नाम पर शराब खपत बढ़ाने का आरोप लगाया है।
प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा कि शराबबंदी की बात करने वाली भाजपा सरकार अब नई व्यवस्था के जरिए शराब कारोबार में कमीशन आधारित सिस्टम तैयार कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार शराब निर्माता कंपनियों से ब्रांडवार दर मंगाकर उस पर सेस जोड़कर नई कीमत तय करने जा रही है, जिससे कंपनियां कथित रूप से कमीशन जोड़कर दर प्रस्तावित करेंगी।
कांग्रेस का दावा है कि जिन राज्यों में निजी ठेकेदारों के माध्यम से शराब दुकानें संचालित होती हैं, वहां कंपनियां 40 से 60 प्रतिशत तक छूट देती हैं, जबकि छत्तीसगढ़ में पूरी दर पर खरीद प्रक्रिया अपनाने से वित्तीय अनियमितताओं की आशंका बढ़ रही है।
श्री शुक्ला ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व वाली सरकार के फैसलों से स्पष्ट है कि भाजपा का शराबबंदी संबंधी रुख केवल राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित था। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में पहले 67 नई शराब दुकानें खोली गईं और अब अतिरिक्त दुकानों की तैयारी की जा रही है, जिससे शराब की उपलब्धता और खपत दोनों बढ़ रही हैं।
कांग्रेस ने यह भी आरोप लगाया कि पूर्व में संचालित लगभग 700 दुकानों को कंपोजिट बनाकर देशी और अंग्रेजी शराब की संयुक्त बिक्री शुरू कर दी गई है, जिससे बिक्री काउंटरों की संख्या प्रभावी रूप से दोगुनी हो गई है। साथ ही अवैध शराब बिक्री, तस्करी और नकली होलोग्राम वाली शराब के मामलों में वृद्धि का भी दावा किया गया।
कांग्रेस ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार राजस्व के नाम पर प्रदेश को नशे की ओर धकेल रही है और शराब कारोबार से काली कमाई को बढ़ावा दिया जा रहा है।
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