पुरस्कार विजेता शोध प्रस्ताव की बारीकियों पर शोध निदेशक डॉ. मनीषा अग्रवाल ने साझा किए महत्वपूर्ण सूत्र रायपुर। मैट्स विश्वविद्यालय में सोम...
पुरस्कार विजेता शोध प्रस्ताव की बारीकियों पर शोध निदेशक डॉ. मनीषा अग्रवाल ने साझा किए महत्वपूर्ण सूत्र
रायपुर। मैट्स विश्वविद्यालय में सोमवार को "पुरस्कार विजेता शोध प्रस्ताव लिखने की मुख्य विशेषताएँ" विषय पर एक विशेषज्ञ व्याख्यान का आयोजन हुआ। विश्वविद्यालय के अनुसंधान नवाचार केंद्र की ओर से आयोजित इस सत्र में विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों के संकाय सदस्य और शोधार्थियों ने उत्साहपूर्वक भागीदारी निभाई।
मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित रहीं विश्वविद्यालय की शोध निदेशक डॉ. मनीषा अग्रवाल। उन्होंने शोध प्रस्ताव लेखन की जटिलताओं को सरल और व्यावहारिक भाषा में समझाते हुए बताया कि एक उत्कृष्ट शोध प्रस्ताव किन तत्वों पर खरा उतरता है। उन्होंने कहा, "किसी भी शोध प्रस्ताव की सफलता उसकी स्पष्टता, सुसंगतता, मौलिकता और व्यवहारिकता में निहित होती है। प्रस्ताव में शोध समस्या की स्पष्ट परिभाषा, ठोस तर्क, स्पष्ट उद्देश्य और सटीक बजट विवरण अनिवार्य हैं।"
डॉ. अग्रवाल ने शोध अनुदान के विभिन्न स्वरूपों—व्यक्तिगत, संस्थागत, अनुरोधित, अवांछित, पूर्व-प्रस्ताव और निरंतर प्रस्तावों—का भी विस्तारपूर्वक अंतर समझाया। उन्होंने यह भी बताया कि शोध प्रस्ताव तैयार करते समय संस्थान की आवश्यकताओं और सामाजिक प्रासंगिकता को भी ध्यान में रखना आवश्यक है।
कार्यक्रम में मौजूद कुलाधिपति गजराज पगारिया, कुलपति डॉ. के.पी. यादव, महानिदेशक पीयूष पगारिया, रजिस्ट्रार गोकुलानंद पांडा एवं डीन डॉ. उमेश गुप्ता ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे व्याख्यान शिक्षाविदों को गुणवत्ता युक्त शोध कार्य के लिए प्रेरित करते हैं। उन्होंने संकाय सदस्यों और शोधार्थियों को उच्च स्तरीय शोध प्रस्ताव तैयार करने हेतु प्रोत्साहित किया।
सत्र के अंत में प्रतिभागियों ने डॉ. अग्रवाल से विभिन्न जिज्ञासाओं पर प्रश्न भी पूछे, जिनका उन्होंने सहज और तार्किक उत्तर देकर शंकाओं का समाधान किया।
कार्यक्रम का समापन सकारात्मक ऊर्जा और शोध के प्रति renewed commitment के साथ हुआ।
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