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abernews. चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से जुड़े कानून को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान सीजेआई सूर्यकांत ने खुद को मामले से अलग कर लिया। उन्होंने साफ कहा कि वे नहीं चाहते कि उन पर किसी भी तरह के हितों के टकराव (कॉन्फ्लिक्ट ऑफ इंटरेस्ट) का आरोप लगे।
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने सुझाव दिया कि इस मामले को किसी दूसरी बेंच के पास भेजा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि बेहतर होगा कि ऐसी पीठ इस मामले को सुने, जिसमें कोई भी भावी CJI शामिल न हो।
दूसरी बेंच को सौंपा जाएगा मामला
इस पर CJI सूर्यकांत ने सहमति जताते हुए कहा कि मामले को ऐसी बेंच के पास भेजा जाएगा, जहां भविष्य में किसी तरह का विवाद या पक्षपात का आरोप न लगे। सुनवाई के दौरान यह भी उल्लेख किया गया कि जस्टिस बागची और जस्टिस पंचोली भी भविष्य में CJI बनने की कतार में हैं।
2023 के कानून को दी गई है चुनौती
यह मामला 2023 में बने उस कानून से जुड़ा है, जिसमें चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया में बदलाव किया गया था। नए कानून के तहत चयन समिति में प्रधानमंत्री, एक केंद्रीय मंत्री और लोकसभा में विपक्ष के नेता को शामिल किया गया है, जबकि भारत के मुख्य न्यायाधीश को इस प्रक्रिया से बाहर कर दिया गया है।
सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसले का संदर्भ
गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने मार्च 2023 में अपने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा था कि जब तक इस विषय पर कोई कानून नहीं बनता, तब तक चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति एक समिति के जरिए की जाए, जिसमें प्रधानमंत्री, विपक्ष के नेता और CJI शामिल हों।
कोर्ट का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति स्वतंत्र और निष्पक्ष तरीके से हो तथा उस पर कार्यपालिका का प्रभाव न पड़े। हालांकि, बाद में संसद द्वारा नया कानून लाए जाने के बाद इस प्रक्रिया में बदलाव कर दिया गया।
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