मोहला-मानपुर। छत्तीसगढ़–महाराष्ट्र सीमा से लगे क्षेत्र में बाघ का आतंक एक बार फिर सामने आया है। औंधी तहसील के बागडोंगरी ग्राम पंचायत क्षेत्र...
मोहला-मानपुर। छत्तीसगढ़–महाराष्ट्र सीमा से लगे क्षेत्र में बाघ का आतंक एक बार फिर सामने आया है। औंधी तहसील के बागडोंगरी ग्राम पंचायत क्षेत्र में 6 मार्च को दिन-दहाड़े बाघ ने मवेशी पर हमला कर दिया। वहीं 6 और 7 मार्च की दरमियानी रात बाघ गांव के पास पहुंच गया, जिससे डर के मारे ग्रामीणों को पेड़ पर चढ़कर अपनी जान बचानी पड़ी।
जानकारी के अनुसार मानपुर दक्षिण वन परिक्षेत्र के औंधी क्षेत्र के बागडोंगरी गांव में एक ग्रामीण का बैल गांव के आसपास चर रहा था, तभी बाघ ने उस पर हमला कर दिया। किसी तरह बैल बाघ के चंगुल से छूटकर घर पहुंचा। जांच करने पर उसके शरीर पर बाघ के पंजों के निशान और गर्दन में दांतों के गहरे घाव पाए गए।
खेत में काम कर रहे ग्रामीणों को दौड़ाया
इसी बागडोंगरी पंचायत के आश्रित मोहल्ले मरकाटोला में भी बाघ ने दहशत फैला दी। खेत में भुट्टे की फसल की रखवाली कर रहे दो ग्रामीणों को बाघ ने दौड़ा लिया। जान बचाने के लिए दोनों ग्रामीण फुर्ती से पास के एक पेड़ पर चढ़ गए। काफी देर तक बाघ पेड़ के आसपास मंडराता रहा और हमला करने की फिराक में रहा।
इस बीच गांव में लोगों को घटना की जानकारी मिली तो बड़ी संख्या में ग्रामीण टॉर्च लेकर मौके पर पहुंचे। लोगों की आवाज और टॉर्च की रोशनी देखकर बाघ जंगल की ओर भाग गया, जिसके बाद पेड़ पर चढ़े ग्रामीण सुरक्षित नीचे उतर सके।
ग्रामीणों में दहशत, महुआ संग्रहण पर भी असर
लगातार बाघ की आमद और हमलों की घटनाओं से क्षेत्र के ग्रामीणों में दहशत का माहौल है। इन दिनों महुआ संग्रहण का समय चल रहा है, लेकिन बाघ के डर से ग्रामीण जंगल जाने से कतरा रहे हैं। इससे उनकी आजीविका पर भी असर पड़ रहा है।
वन विभाग ने क्षेत्र में ट्रैप कैमरे लगाए हैं और बाघ की गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है। साथ ही ग्रामीणों से सतर्क रहने और जंगल में अकेले न जाने की अपील की गई है। बाघ की मौजूदगी के कारण जंगल के रास्ते स्कूल जाने वाले बच्चों में भी डर का माहौल है।
डेढ़ महीने से इलाके में बाघ का आतंक
बताया जा रहा है कि इस इलाके में पिछले करीब डेढ़ महीने से बाघ की चहलकदमी बनी हुई है। 12 फरवरी को गहनगट्टा गांव में बाघ ने एक मवेशी का शिकार किया था। इसके बाद महाराष्ट्र के केहकावाही गांव में एक ग्रामीण को मार डाला था। अगले ही दिन बाघ ने छत्तीसगढ़ के पीटेमेटा गांव में एक और मवेशी को शिकार बनाया था। अब बागडोंगरी इलाके में बाघ की मौजूदगी से ग्रामीणों की चिंता बढ़ गई है।
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