रायपुर, 23 फरवरी 2026। छत्तीसगढ़ की धरती केवल खनिज संपदा और सांस्कृतिक विरासत के लिए ही नहीं, बल्कि अपनी अनुपम प्राकृतिक धरोहरों के लिए भी ज...
रायपुर, 23 फरवरी 2026। छत्तीसगढ़ की धरती केवल खनिज संपदा और सांस्कृतिक विरासत के लिए ही नहीं, बल्कि अपनी अनुपम प्राकृतिक धरोहरों के लिए भी जानी जाती है। राजधानी रायपुर से लगभग 100 किलोमीटर दूर महासमुंद जिले में स्थित बारनवापारा वन्यजीव अभयारण्य प्रकृति प्रेमियों और रोमांच के शौकीनों के लिए ऐसा ही एक अनुपम ठिकाना है, जहां जंगल केवल देखा नहीं जाता, बल्कि महसूस किया जाता है।
करीब 245 वर्ग किलोमीटर में फैला यह अभयारण्य साल और सागौन के घने वृक्षों से आच्छादित है। जैसे ही वाहन अभयारण्य की सीमा में प्रवेश करता है, शहर का शोर पीछे छूट जाता है और सामने खुलती है हरियाली की एक शांत, गूंजती हुई दुनिया—जहां हवा में पत्तों की सरसराहट भी एक संगीत-सी प्रतीत होती है।
वन्य जीवन की धड़कन
बारनवापारा की पहचान इसकी समृद्ध जैव विविधता है। यहां चीतल के झुंड खुले मैदानों में सहजता से चरते दिखाई देते हैं, तो सांभर अपनी गंभीर चाल से जंगल की गहराइयों में खो जाते हैं। नीलगाय की ऊंची काया, जंगली सूअर की चंचलता और चौसिंगा की दुर्लभ उपस्थिति वन्यजीव प्रेमियों के लिए आकर्षण का केंद्र है।
कभी-कभी भाग्य साथ दे तो तेंदुए की झलक भी देखने को मिल जाती है, जो इस जंगल का अदृश्य सम्राट माना जाता है। इसके अतिरिक्त भालू की मौजूदगी इस वन क्षेत्र को और भी जीवंत बनाती है। पक्षियों की अनेक प्रजातियां सुबह और शाम के समय वातावरण को मधुर स्वर से भर देती हैं।
रोमांच से भरपूर जीप सफारी
वन विभाग द्वारा संचालित जीप सफारी पर्यटकों को सुरक्षित और व्यवस्थित तरीके से जंगल के भीतर ले जाती है। सुबह की पहली किरणों के साथ जब धूप पेड़ों के बीच छनकर आती है, तब वन्यजीवों को देखने का सर्वोत्तम अवसर मिलता है। शाम के समय जंगल की बदलती रंगत और वन्यजीवों की सक्रियता रोमांच को और बढ़ा देती है।
सफारी के दौरान प्रशिक्षित गाइड जंगल की कहानियां सुनाते हैं—कहां किस प्राणी की गतिविधि अधिक रहती है, किस पेड़ की उम्र कितनी है और किस रास्ते से गुजरते समय अधिक सतर्क रहना चाहिए। यह अनुभव केवल पर्यटन नहीं, बल्कि प्रकृति से संवाद का अवसर बन जाता है।
पहुंचने की सुविधाजनक राह
अभयारण्य सड़क, रेल और हवाई मार्ग से सुगमता से जुड़ा हुआ है। निकटतम हवाई अड्डा रायपुर स्थित स्वामी विवेकानंद एयरपोर्ट है, जबकि रेल यात्रियों के लिए रायपुर जंक्शन सबसे सुविधाजनक स्टेशन है। रायपुर, महासमुंद और बलौदाबाजार से नियमित बस और टैक्सी सेवाएं उपलब्ध हैं। निजी वाहन से पहुंचना अधिक सुविधाजनक और समयबचत विकल्प माना जाता है।
मोहदा रिसोर्ट : जंगल के बीच सुकून का ठिकाना
अभयारण्य की यात्रा को और सुखद बनाता है पर्यटन मंडल द्वारा संचालित मोहदा रिसोर्ट। हरियाली से घिरे शांत परिसर में स्थित यह रिसोर्ट आधुनिक सुविधाओं से युक्त है। यहां सुव्यवस्थित कमरे, रेस्टोरेंट, बच्चों के खेलने की जगह और खुला प्राकृतिक वातावरण पर्यटकों को आरामदायक अनुभव प्रदान करता है।
परिवार और मित्रों के समूह के लिए यह आदर्श ठहराव स्थल है। स्थानीय व्यंजनों का स्वाद यहां की खास पहचान है, जो छत्तीसगढ़ की पारंपरिक पाक-संस्कृति से परिचित कराता है।
तुरतुरिया : आस्था और प्रकृति का संगम
बारनवापारा से सटे क्षेत्र में स्थित तुरतुरिया धार्मिक, पौराणिक और ऐतिहासिक महत्व का केंद्र है। घने जंगलों और पहाड़ियों से घिरे इस क्षेत्र में बहती छोटी जलधाराएं इसकी सुंदरता को और निखारती हैं।
लोक मान्यता है कि यह स्थल महर्षि वाल्मीकि के आश्रम से जुड़ा रहा है। मान्यता के अनुसार माता सीता ने वनवास के दौरान यहां आश्रय लिया था और लव-कुश का जन्म भी इसी क्षेत्र में हुआ। इस कारण यह स्थान श्रद्धा और आस्था का प्रतीक बन गया है।
तुरतुरिया में प्राचीन मंदिरों और संरचनाओं के अवशेष भी पाए गए हैं, जो इसकी ऐतिहासिक पृष्ठभूमि को दर्शाते हैं। यहां के प्राकृतिक गरम जल कुंड भी आकर्षण का केंद्र हैं, जिनके जल को स्वास्थ्यवर्धक माना जाता है।
सिरपुर : इतिहास की जीवंत विरासत
अभयारण्य से लगभग 45 किलोमीटर दूर स्थित सिरपुर ऐतिहासिक और पुरातात्विक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण स्थल है। प्राचीन मंदिरों, बौद्ध विहारों और उत्खनन से प्राप्त अवशेषों के कारण यह क्षेत्र इतिहास प्रेमियों के लिए विशेष आकर्षण रखता है।
यहां की धरोहरें प्राचीन भारत की सांस्कृतिक समृद्धि का साक्ष्य प्रस्तुत करती हैं। प्रकृति भ्रमण के साथ इतिहास का अध्ययन इस क्षेत्र को एक पूर्ण पर्यटन परिपथ का रूप देता है।
यात्रा का उपयुक्त समय और सावधानियां
बारनवापारा घूमने का सर्वोत्तम समय अक्टूबर से जून तक माना जाता है। वर्षा ऋतु में हरियाली अपने चरम पर होती है, हालांकि कभी-कभी सफारी सीमित हो सकती है।
यात्रा के दौरान हल्के रंग के वस्त्र पहनना, दूरबीन और कैमरा साथ रखना तथा वन्यजीवों से सुरक्षित दूरी बनाए रखना आवश्यक है। प्लास्टिक का उपयोग न करना और स्वच्छता बनाए रखना प्रत्येक पर्यटक की जिम्मेदारी है।
प्रकृति, इतिहास और सुकून का संगम
बारनवापारा अभयारण्य, तुरतुरिया और सिरपुर मिलकर एक ऐसा पर्यटन परिपथ रचते हैं, जहां प्रकृति का रोमांच, इतिहास की गूंज और शांत वातावरण एक साथ अनुभव किए जा सकते हैं।
यदि आप सप्ताहांत में सुकून, रोमांच और आध्यात्मिक शांति की तलाश में हैं, तो यह क्षेत्र आपके लिए आदर्श गंतव्य सिद्ध हो सकता है। यहां की हर सुबह नई आशा लेकर आती है और हर शाम जंगल की गोद में ढलती हुई एक यादगार अनुभव बन जाती है।
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