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प्रदेश में खाद की कालाबाजारी चरम पर है और कांग्रेस सरकार ED के विरोध में धरने पर : कोमल हुपेंडी

किल्लत के चलते सरगुजा से लेकर बस्तर तक खाद दो से तीन गुना में बिक रही किसान परेशान और मजबूर : मनोज दुबे रायपुर । आम आदमी पार्टी के प्रदेश अध...


किल्लत के चलते सरगुजा से लेकर बस्तर तक खाद दो से तीन गुना में बिक रही किसान परेशान और मजबूर : मनोज दुबे

रायपुर । आम आदमी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष,कोमल हुपेंडी, ने किसानों के हक में आवाज बुलंद कर कहा कि प्रदेश में खाद की कालाबाजारी चरम पर है और प्रदेश सरकार ED के विरोध में धरने पर बैठी है। किसान की दुर्दशा से पूरे प्रदेश में आम आदमी पार्टी व्यथित है।  
कांकेर जिले सहित पूरे बस्तर में दो से तीन गुना कीमत पर खाद की बिक्री हो रही है और कांग्रेस और भाजपा सिर्फ बयान बाजी में लगी हुई है।

पूरे छत्तीसगढ़ में सिर्फ खाद ही नहीं बीज का संकट भी है और जमकर कालाबाजारी चल रही है। धमतरी में खाद संकट पर किसान मचा रहे हंगामा लेकिन कोई सुननेवाला नहीं है।मानसून करीब एक सप्ताह लेट से आया तथा प्री-मानसून की बारिश भी पर्याप्त नहीं हुई. इसके कारण धमतरी जिले में किसानी कार्य पिछड़ गया.आम तौर में जून के प्रथम सप्ताह में किसान जोताई कर लेते है. इस बार जुताई व बुवाई ने 20 जून के बाद जोर पकड़ा है. किसानी कार्य यहाँ करीब 15 दिन पिछड़ गया. जिले में अब तक 366 मिमी बारिश हुई है, जो औसत वर्षा से महज 50 फीसदी है. किसानों को खाद की किल्लत से भी जूझना पड़ रहा है. यहां सोसायटियों के माध्यम से 45 हजार टन खाद वितरण का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन अब तक भंडारण सिर्फ साढ़े 19 हजार टन का हो पाया, जिसमें वितरण 17 हजार टन का हुआ है. महंगे दाम के बाद भी खाद नहीं मिलने के कारण किसान सोसायटी में हंगामा मचा चुके है।

प्रदेश में कुछ देरी से आया मानसून राज्य में सक्रिय हो गया है, पर किसान धान के पसंद के बीज और खाद के संकट से जूझ रहे हैं. रासायनिक खाद को लेकर सबसे ज्यादा दिक्कत है. केंद्र सरकार से आपूर्ति प्रभावित होने की वजह किसानों को प्राथमिक साख सहकारी समितियों में उपलब्ध न होने की वजह से लगातार परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कई समितियों में सरना व महामाया धान के बीज खत्म हो गए है।दुर्ग में डबल लॉक व अधिकांश समितियों में डीएपी खाद उपलब्ध नहीं है।

धमतरी में सिर्फ 50 फीसदी बारिश हुई है और बारिश के बाद से किसान धान की बोनी में जुटे है लेकिन समितियों से पर्याप्त खाद नहीं मिल रहीं. इसका फायदा कारोबारी उठा रहे हैं. कांकेर जिले में प्रशासन की नाक के नीचे खाद की जमकर कालाबाजारी हो रही है. किसान दो से तीन गुना कीमत पर खाद खरीदने पर मजबूर हैं. यूरिया की मांग कम है, पर 266 रुपए बोरी की ये खाद किसानों को साढ़े चार सौ से पांच रुपए बोरी में खरीदनी पड़ रही है।

 प्रदेश उपाध्यक्ष,आप ,मनोज दुबे ने बताया की सरगुजा में इसी तरह के हाल है। किल्लत के चलते सरगुजा से लेकर बस्तर तक खाद दो से तीन गुना में बिक रही किसान परेशान और मजबूर है। 13 सौ रुपए की डीएपी 18 सौ से लेकर दो हजार रुपए में बेची जा रही । शिकायत के बावजूद जिला प्रशासन व कृषि विभाग के अधिकारी मौन साधे बैठे हैं. खाद की बिक्री करने वाले कुछ दुकानदारों  ने बताया कि  सरना और महामाया धान के बीज की भी धडल्ले से कालाबाजारी चालू है।  दुकानदारों ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि ऊपर से ही खाद ज्यादा रेट में मिल रहा है इसलिए अधिक दर पर खाद बेचना मजबूरी है। प्रदेश का किसान है की खाद-बीज के लिए भटक रहा हैं।

प्रदेश के जिले में समितियों में डीएपी खाद उपलब्ध नहीं है. इसी प्रकार बहुत से सहकारी समितियों में खाद उपलब्ध ही नहीं है. एक जिले में जिला सहकारी केंद्रीय बैंक के सूत्रों के अनुसार जिले की 86 सहकारी समितियों में से, मात्र 20 समितियों में डीएपी खाद है. वह भी नहीं के बराबर है.

दलहन, तिलहन बीज के भी लाले  राजनांदगांव जिले की सोसायटियों में अभी भी खाद-बीज की किल्लत बनी हुई है. दलहन, तिलहन बीज के लिए किसान चक्कर काट रहे हैं। डीएपी तथा पोटाश खाद की रैक आ जाने के बाद भी किसानों को डीएपी तथा पोटाश की उपलब्धता नहीं हो पा रही है। धान तथा सोयाबीन बीज को छोड़ दिया जाए तो शेष बीज के लिए किसान अभी भी भटक रहे हैं। कमोबेश यही स्थिति खाद की भी पूरे प्रदेश में बनी हुई है. 

अपेक्षा के मुताबिक डीएपी, पोटाश, यूरिया, सुपरफास्फेट सहित अन्य खाद का भंडारण भी नहीं हो पाया है। किसानों को खाद की व्यवस्था निजी दुकानों से करनी पड़ रही है।कृषि विभाग के उप संचालक  का कहना है कि सोसायटियों में खाद-बीज का पर्याप्त भंडारण कराया जा रहा है । किसानों की मांग के अनुसार खाद-बीज की व्यवस्था की जा रही है । वस्तुस्थिति यह है कि कब तक होगा ,भगवान भरोसे है  समितियों में खाद भंडारण लक्ष्य से करीब आधा ही हो पाया है। आम आदमी पार्टी का सवाल है कि क्या हमारा किसान हमेशा किसी न किसी कारण से दुखी ,परेशान और मजबूर हो रहेगा। केंद्र की भाजपा सरकार और प्रदेश की भूपेश सरकार किसान हितोशी साबित करने में अब पूरी तरह फेल हो चुकी है।आम आदमी पार्टी किसानों के साथ इस संघर्ष में पूरी तरह शामिल है और उनका हक दिला कर ही दम लेंगी।

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