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सोनिया गांधी ने गृहमंत्री ताम्रध्वज साहू को दी गुजरात चुनाव में जिम्मेदारी

रायपुर। लोकसभा आम चुनाव के प्रचार अभियान के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भाटापारा की सभा में गुजरात के मोदी और छत्तीसगढ़ के साहू को एक ...


रायपुर। लोकसभा आम चुनाव के प्रचार अभियान के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भाटापारा की सभा में गुजरात के मोदी और छत्तीसगढ़ के साहू को एक बताकर एक कार्ड खेला था। अब कांग्रेस ने गुजरात में ऐसा ही दांव चलने की कोशिश की है। कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी ने छत्तीसगढ़ के गृहमंत्री और कांग्रेस पिछड़ा वर्ग विभाग के राष्ट्रीय अध्यक्ष ताम्रध्वज साहू को बड़ी जिम्मेदारी सौंपी है। साहू को गुजरात में होने वाले स्थानीय निकाय चुनावों के लिए कांग्रेस का आब्जर्वर बनाया गया है। ताम्रध्वज साहू 26 जनवरी के बाद गुजरात प्रवास पर जाएंगे। ताम्रध्वज साहू को वहां गुजरात के प्रभारी राजीव सातव के साथ काम करना है। उनके साथ समन्वय करना है और राष्ट्रीय नेतृत्व के दिशा निदेर्शों के जमीनी क्रियान्वयन पर नजर रखनी है। गृहमंत्री ताम्रध्वज साहू ने कहा, यह उनके लिए महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। गुजरात महत्वपूर्ण राज्य है जहां से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आते हैं। उन्होंने कहा, वे गुजरात में स्थानीय स्थितियों-परिस्थितियों के मुताबिक रणनीति तैयार कर काम करेंगे। उन्होंने कहा, वहां चुनौती कठिन है लेकिन अपनी जिम्मेदारी को पूरा करने की पूरी कोशिश करुंगा। छत्तीसगढ़ की तरह ही गुजरात में पिछड़ा वर्ग के मतदाताओं को निर्णायक माना जाता है। ताम्रध्वज साहू कांग्रेस पिछड़ा वर्ग विभाग के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं, इसलिए देश भर में पिछड़ा वर्ग समाज में उनकी पैठ मानी जाती है। अब मोदी के गढ़ में कांग्रेस का यह दांव कितना काम करता है यह चुनाव के नतीजे बताएंगे। लेकिन छत्तीसगढ़ की राजनीति में इस नियुक्ति को बड़ी अहमियत दी जा रही है।
21 फरवरी को 6 महानगर पालिकाओं के लिए होना है मतदान
गुजरात में स्थानीय निकाय चुनाव की घोषणा हो चुकी है। गुजरात राज्य निर्वाचन आयोग के मुताबिक वहां 6 महानगर पालिकाओं के लिए 21 फरवरी को मतदान होना है। वहीं 28 फरवरी को शेष निकायों के चुनाव प्रस्तावित हैं। दूसरे चरण में 81 नगर पालिकाएं, 31 जिला पंचायत और 231 जनपद पंचायतें शामिल हैं। विधानसभा चुनाव से ठीक एक साल पहले आए इस चुनाव को कांग्रेस महत्वपूर्ण मान रही है। उनकी कोशिश है कि इन निकायों पर कब्जे से विधानसभा में बहुमत की राह खोली जाए।

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