——

Page Nav

HIDE

Grid

GRID_STYLE

Pages

Classic Header

{fbt_classic_header}

Top Ad

ब्रेकिंग :

latest

Breaking News

- Advertisement - Ads " alt="" />" alt="" />

अब ‘प्रतिनिधि’ बनकर नहीं चल पाएगा महिला पार्षद का परिवार

रायपुर, 10 अगस्त। नगरीय निकायों में निर्वाचित महिला जनप्रतिनिधियों के कामकाज में उनके पारिवारिक सदस्यों के प्रतिनिधि के रूप में दखल पर राज्य...



रायपुर, 10 अगस्त। नगरीय निकायों में निर्वाचित महिला जनप्रतिनिधियों के कामकाज में उनके पारिवारिक सदस्यों के प्रतिनिधि के रूप में दखल पर राज्य सरकार ने रोक लगा दी है। नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने संबंधित नियमों में संशोधन कर इसकी अधिसूचना जारी कर दी है। राजपत्र में प्रकाशन के साथ ही नया प्रावधान प्रदेश के सभी नगरीय निकायों में लागू हो गया है।

नए संशोधन के मुताबिक किसी भी नगरीय निकाय में निर्वाचित महिला जनप्रतिनिधि के पति, पुत्र, पुत्री, भाई, बहन या अन्य निकट पारिवारिक सदस्य अथवा नातेदार को उनके परोक्ष प्रतिनिधि या समन्वयक के रूप में नाम-निर्दिष्ट या नियुक्त नहीं किया जा सकेगा।

सरकार ने यह बदलाव छत्तीसगढ़ नगरपालिक (लोकसभा सदस्य या राज्य विधानसभा के सदस्य या राज्यसभा के सदस्य द्वारा प्रतिनिधि के रूप में नाम निर्देशन हेतु अर्हताएं) नियम, 2022 में संशोधन करते हुए किया है। इसका सीधा असर उन मामलों पर होगा, जहां निर्वाचित महिला प्रतिनिधि की जगह उनके पति या परिवार के अन्य सदस्य प्रतिनिधि के तौर पर कामकाज में सक्रिय रहते हैं।

अधिसूचना के बाद अब नगरीय निकायों में निर्वाचित महिला प्रतिनिधियों की भूमिका और जिम्मेदारी सीधे उन्हीं की रहेगी। परिवार के किसी सदस्य को उनके नाम पर प्रतिनिधि या समन्वयक के तौर पर नियुक्त करने का रास्ता बंद कर दिया गया है।

No comments