बोले- महिलाएं अब हर क्षेत्र में आगे बढ़कर बन रहीं आत्मनिर्भर, शिक्षा और मेहनत से मिलती है सफलता रायपुर। महिलाओं के सशक्तिकरण और आत्मनिर्भर...
बोले- महिलाएं अब हर क्षेत्र में आगे बढ़कर बन रहीं आत्मनिर्भर, शिक्षा और मेहनत से मिलती है सफलता
रायपुर। महिलाओं के सशक्तिकरण और आत्मनिर्भरता की मिसाल पेश करते हुए छत्तीसगढ़ विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह शुक्रवार को राजनांदगांव में आयोजित श्रमिक सम्मेलन के बाद ई-रिक्शा में बैठकर स्पीकर हाउस के लिए रवाना हुए। खास बात यह रही कि यह ई-रिक्शा नया ढाबा की हितग्राही और ई-रिक्शा चालक दीदी श्रीमती सरिता वर्मा चला रही थीं।
राजनांदगांव के पद्मश्री गोविंदराम निर्मलकर ऑडिटोरियम में आयोजित श्रमिक सम्मेलन में शामिल होने के बाद डॉ. रमन सिंह ने महिला ई-रिक्शा चालक को प्रोत्साहित करते हुए उनके ई-रिक्शा से स्पीकर हाउस तक का सफर किया। इस दौरान उनके साथ जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री दुर्गा प्रसाद अधिकारी और श्री सुमीत उपाध्याय भी मौजूद रहे।
महिलाएं हर क्षेत्र में बना रहीं अपनी पहचान
श्रमिक महिलाओं का उत्साह बढ़ाते हुए विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने कहा कि आज महिलाएं केवल घर की जिम्मेदारियों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि शिक्षा, रोजगार और आत्मनिर्भरता के हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं। महिलाएं साइकिल, मोटरसाइकिल, कार चलाने से लेकर विमान उड़ाने तक अपनी क्षमता साबित कर रही हैं।
उन्होंने कहा कि महिलाओं ने शिक्षा के साथ-साथ आर्थिक रूप से सक्षम और आत्मनिर्भर बनने की दिशा में ऐतिहासिक कदम बढ़ाए हैं। उनके इस प्रोत्साहन से ई-रिक्शा चालक दीदी सरिता वर्मा के चेहरे पर खुशी और आत्मविश्वास साफ दिखाई दिया।
हितग्राहियों ने साझा किए बदलाव के अनुभव
श्रमिक सम्मेलन में शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं से जीवन में आए बदलावों की तस्वीर देखने को मिली। श्रमिक महिलाओं ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि योजनाओं और अवसरों से उनके जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आया है।
इस दौरान डॉ. रमन सिंह ने एक अन्य ई-रिक्शा चालक दीदी श्रीमती उषा साहू से बातचीत की। उन्होंने उनकी शिक्षा के बारे में जानकारी लेते हुए उन्हें 10वीं के बाद भी पढ़ाई जारी रखने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि शिक्षा ही आत्मनिर्भरता और सफलता का सबसे मजबूत माध्यम है।
पति के सहयोग से बढ़ी आत्मनिर्भरता
श्रीमती उषा साहू के पति श्री भावेश साहू ने बताया कि उन्होंने अपनी पत्नी को ई-रिक्शा चलाना सिखाया और हमेशा उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने कहा कि ई-रिक्शा संचालन से परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है और बचत में भी वृद्धि हुई है।
महिला ई-रिक्शा चालकों की यह पहल न केवल आत्मनिर्भरता की कहानी बयां करती है, बल्कि समाज में महिलाओं की बदलती भूमिका और बढ़ते आत्मविश्वास का भी उदाहरण बन रही है।

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