नईदिल्ली । केरलम की 92 वर्षीय श्रीमती कोल्लाक्कायिल देवकी अम्मा को अलाप्पुझा जिले में वनीकरण और लगभग 3,000 दुर्लभ पौधों की रक्षा करने के उनक...
नईदिल्ली । केरलम की 92 वर्षीय श्रीमती कोल्लाक्कायिल देवकी अम्मा को अलाप्पुझा जिले में वनीकरण और लगभग 3,000 दुर्लभ पौधों की रक्षा करने के उनके प्रयासों के लिए पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा। 25 मई को राष्ट्रपति भवन में आयोजित एक समारोह में देवकी अम्मा को ये सम्मान मिलेगा। देवकी अम्मा की कहानी सिर्फ पर्यावरण संरक्षण की नहीं, बल्कि संकल्प, धैर्य और निस्वार्थ सेवा का एक बेहतरीन उदाहरण है।
देवकी अम्मा का जन्म साल 1934 में केरलम के अलाप्पुझा जिले के मुथुकुलम गांव में हुआ था। वह पर्यावरण विज्ञान से संबंधित किसी विषय की विशेषज्ञ नहीं हैं, लेकिन वह एक बात भली-भांति जानती हैं कि केवल पेड़ ही इस ग्रह को विनाश से बचा सकते हैं। इसलिए उन्होंने अथक प्रयास किए और लगभग 5 एकड़ की बंजर जमीन को दुर्लभ और औषधीय पौधों वाले एक घने जंगल में बदल दिया, जिसे तपोवन कहा जाता है।
देवकी अम्मा को साल 1980 में एक गंभीर कार दुर्घटना में पैर में चोट लग गई थी, जिसके कारण उन्हें चलने-फिरने में बहुत सावधानी बरतनी पड़ती थी। अपने डॉक्टर की सलाह के अनुसार, शारीरिक रूप से सक्रिय रहने के लिए उन्होंने अपने घर के पीछे पौधे लगाने शुरू किए। उनका पौधे लगाना इसलिए शुरू हुआ कि वे थोड़ा चल फिर लें, लेकिन धीरे-धीरे यह जैसे एक मिशन में बदल गया।
देवकी अम्मा ने 40 साल से अधिक समय तक प्रयास करके एक बंजर जमीन को हरित क्षेत्र बना दिया, जिसमें औषधीय पौधों सहित कई प्रकार के वृक्ष हैं। यही नहीं, यह खूबसूरत जगह मोर, कोयल, उल्लू और बंदर जैसे पशु-पक्षियों का घर भी है। लगभग 200 प्रजातियों के पौधों वाले इस जंगल में तालाब भी हैं। यहां के पौधे प्रचुर मात्रा में फल, सब्जियां और फूल प्रदान करते हैं। अब देवकी अम्मा अपना अधिकांश समय वृक्षों के साथ बिताती हैं।
देवकी अम्मा को अब तक केंद्र सरकार की ओर से नारी शक्ति पुरस्कार, इंदिरा प्रियदर्शिनी वृक्षमित्र पुरस्कार और वनमित्र पुरस्कार सहित कई पुरस्कार दिए जा चुके हैं। इसके अतिरिक्त उन्हें अलाप्पुझा जिले द्वारा सामाजिक वानिकी पुरस्कार और विज्ञान भारती द्वारा भूमित्र पुरस्कार से भी सम्मानित किया जा चुका है। देवकी अम्मा का कहना है कि उनके द्वारा उगाए गए पौधे उनके बच्चे हैं।
25 मई को राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू साल 2026 के पद्म पुरस्कार प्रदान करेंगी। सरकार अपनी पीपुल्स पद्म संकल्पना पर ज्यादा जोर दे रही है, जिसका उद्देश्य पद्म पुरस्कारों को दूरदराज इलाकों के गुमनाम नायकों और सच्ची प्रतिभाओं तक पहुंचाना है, जिन्होंने निस्वार्थ भाव से समाज और कला की सेवा की है। इस बार पद्म पुरस्कारों के लिए 131 लोगों को चुना गया है। इसमें 5 पद्म विभूषण, 13 पद्म भूषण और 113 लोग पद्मश्री से सम्मानित होंगे।
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