उज्जैन। आगामी Simhastha Kumbh Mela 2028 की तैयारियों के बीच Kinnar Akhada की दो दिवसीय बैठक उज्जैन में आयोजित की गई। इस बैठक में देश-विदे...
उज्जैन। आगामी Simhastha Kumbh Mela 2028 की तैयारियों के बीच Kinnar Akhada की दो दिवसीय बैठक उज्जैन में आयोजित की गई। इस बैठक में देश-विदेश से किन्नर समाज के संत शामिल हुए। दूसरे दिन संतभोज और पंडित भोज का आयोजन किया गया, साथ ही अखाड़े के विस्तार, संतों की जिम्मेदारियों और आगामी कुंभ पर्वों की तैयारियों पर चर्चा हुई।
मीडिया से बातचीत में आचार्य महामंडलेश्वर Laxmi Narayan Tripathi ने बताया कि वर्ष 2019 में हुए समझौते के अनुसार किन्नर अखाड़ा आगामी कुंभ और सिंहस्थ में Juna Akhara के साथ ही शाही स्नान करेगा। उन्होंने कहा कि जहां जूना अखाड़ा स्नान करेगा, वहीं किन्नर अखाड़ा भी उनके साथ शामिल रहेगा।
उज्जैन को बताया अपना घर
त्रिपाठी ने कहा कि Ujjain और Mahakaleshwar Jyotirlinga Temple से किन्नर समाज का विशेष आध्यात्मिक संबंध है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2016 के सिंहस्थ में जब किन्नर अखाड़ा पहली बार उज्जैन आया था, तब शहरवासियों ने उन्हें सम्मान और अपनापन दिया। इसी कारण किन्नर समाज इस शहर को अपना घर मानता है।
उन्होंने मांग रखी कि अन्य अखाड़ों की तरह उज्जैन में किन्नर अखाड़े के लिए भी स्थायी मंदिर और आश्रम की व्यवस्था होनी चाहिए। इसके लिए सरकार और प्रशासन से जल्द मांग की जाएगी और मुख्यमंत्री से मिलने का प्रयास भी किया जाएगा।
नए महामंडलेश्वर और श्रीमहंत नियुक्त
त्रिपाठी ने बताया कि अखाड़े के विस्तार के लिए हाल ही में दो नए महामंडलेश्वर और कई श्रीमहंत बनाए गए हैं। देश के Tamil Nadu, Kanyakumari, Jammu and Kashmir, Odisha, West Bengal, Gujarat, Rajasthan और Maharashtra सहित कई राज्यों से किन्नर समाज के लोग अखाड़े से जुड़ रहे हैं।
उन्होंने बताया कि इंटरनेशनल किन्नर अखाड़े से भारत के अलावा Thailand, Sri Lanka और San Francisco (अमेरिका) सहित कई देशों के किन्नर भी जुड़े हुए हैं।
समाज सेवा में भी सक्रिय
बैठक में बताया गया कि किन्नर अखाड़ा केवल धार्मिक गतिविधियों तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज सेवा के कई कार्य भी करता है। इनमें बेटियों की शादी कराना, अनाथ बच्चों की शिक्षा और जरूरतमंदों की सहायता जैसे कार्य शामिल हैं।
बैठक में आगामी कुंभ और सिंहस्थ पर्व को ध्यान में रखते हुए संगठन को और मजबूत बनाने तथा संतों को नई जिम्मेदारियां सौंपने पर भी चर्चा की गई।
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