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Knesset में गूंजा ‘शलोम नमस्ते’: हमास हमले की कड़ी निंदा, फ़लस्तीन मुद्दे पर शांति का संदेश

यरूशलम/तेल अवीव। दो दिवसीय राजकीय दौरे पर इसराइल पहुंचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को इसराइल की संसद कनेसेट को संबोधित करते हुए 7 अ...




यरूशलम/तेल अवीव। दो दिवसीय राजकीय दौरे पर इसराइल पहुंचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को इसराइल की संसद कनेसेट को संबोधित करते हुए 7 अक्टूबर 2023 को हुए हमास हमले की कड़े शब्दों में निंदा की। दैनिक लोकदेश की शैली में कहें तो यह संबोधन केवल कूटनीतिक औपचारिकता नहीं था, बल्कि आतंकवाद के विरुद्ध साझा संकल्प और पश्चिम एशिया में स्थायी शांति के पक्ष में भारत की स्पष्ट आवाज़ भी था।

प्रधानमंत्री ने अपने भाषण की शुरुआत “शलोम नमस्ते” से की, जिससे पूरा सदन तालियों से गूंज उठा। उन्होंने कहा,

“भारत इस बर्बर आतंकी हमले में मारे गए सभी लोगों के प्रति गहरा शोक व्यक्त करता है और पीड़ित परिवारों के दुख को साझा करता है। नागरिकों की हत्या को किसी भी परिस्थिति में तर्कसंगत नहीं ठहराया जा सकता।”

7 अक्टूबर का हमला: ‘आतंक के खिलाफ भारत की स्पष्ट नीति’

प्रधानमंत्री ने 7 अक्टूबर 2023 को इसराइल पर हुए हमास के हमले का उल्लेख करते हुए कहा कि आतंकवाद मानवता का दुश्मन है। भारत स्वयं आतंक का दंश झेल चुका है। उन्होंने 2008 के 2008 Mumbai attacks का जिक्र करते हुए कहा कि उस हमले में भारतीयों के साथ-साथ इसराइली नागरिकों की भी जान गई थी।

उन्होंने कहा,

“हम दर्द को समझते हैं। मुंबई हमलों में हमने अपने निर्दोष नागरिक खोए हैं। इसलिए आतंक के खिलाफ हमारी नीति शून्य सहिष्णुता की है।”

ग़ज़ा और फ़लस्तीन पर संतुलित रुख

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में यह भी स्पष्ट किया कि भारत केवल आतंकवाद की निंदा ही नहीं करता, बल्कि क्षेत्र में स्थायी शांति का भी समर्थक है। उन्होंने कहा कि भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की पहलों और ग़ज़ा शांति प्रस्तावों का समर्थन किया है।

“हमारा मानना है कि इन प्रयासों से क्षेत्र में शांति स्थापित करने में मदद मिलेगी और फ़लस्तीन के मसले का भी समाधान संभव होगा।”

उन्होंने दोहराया कि भारत का रुख संतुलित है—आतंकवाद के खिलाफ कठोर, लेकिन आम नागरिकों के प्रति संवेदनशील।

‘मेरा जन्म उसी दिन हुआ, जिस दिन भारत ने इसराइल को मान्यता दी’


सदन में भावनात्मक क्षण तब आया जब प्रधानमंत्री ने अपने और इसराइल के संबंध का निजी प्रसंग साझा किया। उन्होंने कहा कि उनका जन्म 17 सितंबर 1950 को हुआ था—उसी दिन जब भारत ने इसराइल को आधिकारिक मान्यता दी थी।

प्रधानमंत्री ने Israel और India की हजारों वर्ष पुरानी सभ्यताओं का जिक्र करते हुए कहा कि दोनों देशों ने संघर्षों के बीच भी अपनी पहचान और आत्मबल को बनाए रखा है।

होलोकॉस्ट का जिक्र, इतिहास से सीख का संदेश

अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने होलोकॉस्ट को मानव इतिहास का सबसे काला अध्याय बताया और कहा कि इतिहास की त्रासदियों से सीख लेकर ही दुनिया को आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने कहा कि नफरत और हिंसा का जवाब मानवता और सहयोग से ही दिया जा सकता है।

‘सिर्फ मित्र नहीं, भाई हैं’ – नेतन्याहू

प्रधानमंत्री मोदी से पहले इसराइली प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu ने सदन को संबोधित करते हुए मोदी का स्वागत किया। उन्होंने कहा,

“नरेंद्र, मेरे प्रिय मित्र, आज आपके यहां आने से मैं बेहद भावुक हूं… आप केवल मित्र नहीं, बल्कि भाई हैं।”

नेतन्याहू ने दोनों देशों के बीच बढ़ते व्यापार, तकनीकी सहयोग और सामरिक साझेदारी का उल्लेख करते हुए कहा कि पिछली मुलाकात के बाद से संबंध कई गुना मजबूत हुए हैं।

बेन गुरियन एयरपोर्ट पर भव्य स्वागत


प्रधानमंत्री मोदी के Ben Gurion Airport पहुंचने पर स्वयं नेतन्याहू और उनकी पत्नी सारा नेतन्याहू ने उनका स्वागत किया। तेल अवीव में उतरते ही मोदी ने सोशल मीडिया पर लिखा कि वे इस गर्मजोशी से अभिभूत हैं और उम्मीद करते हैं कि यह दौरा भारत–इसराइल मित्रता को नई ऊंचाई देगा।

कनेसेट की इमारत तिरंगे के रंगों में


प्रधानमंत्री ने कनेसेट के स्पीकर को धन्यवाद देते हुए कहा कि संसद भवन को भारतीय तिरंगे के रंगों में सजाया जाना भारत के प्रति सम्मान का प्रतीक है। यह दृश्य दोनों लोकतंत्रों के बीच विश्वास और आत्मीयता का संकेत माना गया।

आतंकवाद के खिलाफ एक स्वर, शांति के लिए संतुलित दृष्टिकोण


प्रधानमंत्री मोदी का यह संबोधन कई संदेशों से भरा रहा—आतंकवाद के खिलाफ अडिग रुख, इसराइल के साथ एकजुटता, और साथ ही फ़लस्तीन प्रश्न के शांतिपूर्ण समाधान की वकालत।
साभार बीबीसी

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