रायपुर। छत्तीसगढ़ का आम बजट कल विधानसभा में पेश किया जाएगा और इसके साथ ही प्रदेश का व्यापारिक वर्ग बड़ी उम्मीदों के साथ सरकार की घोषणाओं का ...
रायपुर। छत्तीसगढ़ का आम बजट कल विधानसभा में पेश किया जाएगा और इसके साथ ही प्रदेश का व्यापारिक वर्ग बड़ी उम्मीदों के साथ सरकार की घोषणाओं का इंतजार कर रहा है। बाजारों में चर्चा का केंद्र इस बार केवल कर राहत नहीं, बल्कि नई तकनीक, व्यापार सरलीकरण और महिला उद्यमिता को प्रोत्साहन बना हुआ है।
व्यापार संगठनों का मानना है कि बदलते आर्थिक परिदृश्य में राज्य को तकनीकी रूप से सशक्त और प्रक्रियागत रूप से सरल बनाना समय की मांग है। खासकर डिजिटल अर्थव्यवस्था और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के दौर में यदि छत्तीसगढ़ ने ठोस कदम उठाए तो यह प्रदेश के युवाओं, स्टार्टअप्स और लघु उद्योगों के लिए बड़ा अवसर साबित हो सकता है।
एआई लैब की मांग, युवाओं को मिले नई दिशा
छत्तीसगढ़ चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज के प्रदेश महामंत्री अजय भसीन ने कहा कि राज्य में व्यापार को प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए आधुनिक तकनीकी ढांचा तैयार करना जरूरी है। उन्होंने नया रायपुर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) लैब स्थापित करने का प्रस्ताव रखते हुए कहा कि इससे प्रदेश के युवाओं और स्टार्टअप्स को स्थानीय स्तर पर नवाचार का अवसर मिलेगा।
भसीन के अनुसार, देश के कई राज्यों में टेक्नोलॉजी हब विकसित किए जा रहे हैं। ऐसे में छत्तीसगढ़ को भी इस दिशा में कदम बढ़ाना चाहिए ताकि यहां के युवा बाहर जाने के बजाय प्रदेश में ही रोजगार और उद्यम के अवसर प्राप्त कर सकें।
व्यापार प्रक्रियाओं का सरलीकरण हो प्राथमिकता
व्यापार संगठनों का कहना है कि लाइसेंस प्रक्रिया, कर निर्धारण और विभागीय अनुमतियों में सरलता लाना अत्यंत आवश्यक है। अजय भसीन ने मांग की कि छोटे और मध्यम व्यापारियों के लिए कर ढांचे को सरल बनाया जाए तथा ऑनलाइन प्रक्रियाओं को और पारदर्शी व त्वरित किया जाए।
उन्होंने कहा कि यदि अनुमति और पंजीयन प्रक्रियाएं आसान होंगी तो नए निवेश को प्रोत्साहन मिलेगा और राज्य की राजस्व वृद्धि भी स्वाभाविक रूप से होगी।
महिला उद्यमियों को उत्पादन से बाजार तक सहयोग
महिला उद्यमियों ने भी इस बार के बजट से बड़ी अपेक्षाएं जताई हैं। चैंबर की महिला इकाई की प्रदेश अध्यक्ष सुमन कन्नौजे ने कहा कि सरकार को महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण के लिए ठोस प्रावधान करने चाहिए।
उन्होंने सुझाव दिया कि महिला स्व-सहायता समूहों और छोटे उद्योगों को कच्चा माल उपलब्ध कराने की व्यवस्थित योजना बनाई जाए। साथ ही उत्पाद तैयार होने के बाद उसके विपणन, ब्रांडिंग और परिवहन की जिम्मेदारी में भी सरकारी सहयोग सुनिश्चित किया जाए।
सुमन कन्नौजे का कहना है कि यदि महिलाओं को उत्पादन से लेकर बाजार तक समग्र सहयोग मिलेगा तो वे आत्मनिर्भर बनेंगी और ग्रामीण व शहरी अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिलेगी।
व्यापार जगत की नजर बजट घोषणाओं पर
व्यापारिक समुदाय का मानना है कि यह बजट केवल आंकड़ों का दस्तावेज न होकर भविष्य की आर्थिक दिशा तय करने वाला रोडमैप होना चाहिए। नई तकनीक, डिजिटल ढांचे का विस्तार, छोटे व्यापारियों को राहत और महिला उद्यमिता को बढ़ावा—ये सभी मुद्दे इस बार चर्चा के केंद्र में हैं।
अब देखना यह है कि विधानसभा में पेश होने वाला बजट व्यापार जगत की इन अपेक्षाओं पर कितना खरा उतरता है। प्रदेश का बाजार वर्ग उम्मीद कर रहा है कि सरकार विकास, रोजगार और सरलीकरण की दिशा में ठोस और व्यावहारिक कदमों की घोषणा करेगी।
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