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रामलाल और उनके परिवार को बकरी पालन से रोजगार की चिंता हुई दूर

    रायपुर । कोरिया जिले में वनांचल में रहने वाले परिवारों के लिए बकरी पालन एक पारंपरिक कार्य रहा है। इस कार्य में उन्हे मिलने वाली एक मदद ...

  

रायपुर । कोरिया जिले में वनांचल में रहने वाले परिवारों के लिए बकरी पालन एक पारंपरिक कार्य रहा है। इस कार्य में उन्हे मिलने वाली एक मदद उनके आजीविका में सुधार का एक बड़ा कदम साबित हो रही है। जिले के सोनहत जनपद पंचायत मुख्यालय ग्राम में रहने वाले श्री रामलाल के लिए मनरेगा योजना के बने पक्के बकरी पालन शेड ने अब सब कुछ बदल दिया है। वह अब एक उन्नत बकरी पालक बनकर बड़ी संख्या में बकरी पालन कर रहे हैं। इस परंपरागत कार्य में अब उनका पूरा परिवार लगा हुआ है और हर दो-तीन माह बाद एक अच्छी आय होने से अब उन्हे रोजगार की कोई चिंता नहीं रह गई है।

सोनहत में रहने वाले किसान श्री रामलाल बतलाते हैं कि पहले उनका अपना कच्चा मकान था और मकान के एक हिस्से में अपने लाभ के लिए कुछ बकरियों को रखते थे लेकिन मौसमी बदलाव में बकरियों को पालना बेहद कठिन था और अक्सर उन्हे नुकसान उठाना पड़ता था। गांव में ही एक किसान के पक्के बकरी शेड से प्रभावित होकर उन्होने अपने लिए एक पक्के बकरी पालन शेड की मांग रखी। ग्राम पंचायत द्वारा उनके आवेदन को अनुशंसित किया गया जिससे महात्मा गांधी नरेगा योजनांतर्गत उनके लिए एक पक्के बकरी पालन शेड की स्वीकृति हुई।

एक लाख पच्चीस हजार रूपए की लागत से ग्राम पंचायत द्वारा रामलाल के लिए एक पक्का बकरी शेड समय पर तैयार कर दिया गया। अब रामलाल के जीवन में रोजगार की चिंता समाप्त हो गई है। वीबी जीरामजी योजना के तहत बने पक्के बकरी पालन शेड से उनके लिए बकरी पालन एक उन्नत व्यवसाय की तरह हो गया है। अब वह एक दर्जन से ज्यादा बकरियों का पालन निश्चिंत होकर करते हैं और उन्हे इससे अच्छा लाभ होने लगा है। किसान रामलाल ने बताया कि बाजार मे बकरे की मांग हमेशा बनी रहती है। ग्राहक घर आकर ले जाते हैं और कीमत भी अच्छी मिल रही है। पिछले महीने ही उन्होने चार बकरे बेचकर तीस हजार का लाभ कमाया है। कुल मिलाकर एक पक्के बकरी शेड से ग्रामीण परिवार के लिए उनका पारंपरिक कार्य ही आजीविका का मुख्य साधन बन चुका है जिससे उनकी आर्थिक निश्चिंतता बढ़ गई है।

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