——

Page Nav

HIDE

Grid

GRID_STYLE

Pages

Classic Header

{fbt_classic_header}

Top Ad

ब्रेकिंग :

latest

Breaking News

- Advertisement - Ads " alt="" />" alt="" />

गांव-गांव में बच्चों की सुरक्षा के लिए तैयार होंगे सुरक्षा प्रहरी: फरीदाबाद में सरपंचों को मिला विशेष प्रशिक्षण

मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने दिया आश्वासन – हर कानूनी मदद को तैयार है जिला विधिक सेवा प्राधिकरण फरीदाबाद  18 अगस्त 2025।  जिले में बच्चों क...



मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने दिया आश्वासन – हर कानूनी मदद को तैयार है जिला विधिक सेवा प्राधिकरण

फरीदाबाद  18 अगस्त 2025। जिले में बच्चों की सुरक्षा अब गांव स्तर पर और भी मजबूत होगी। जिला प्रशासन की पहल और मिशन वात्सल्य के तहत फरीदाबाद ब्लॉक के सरपंचों को बाल अधिकारों की सुरक्षा और संरक्षण से जुड़ी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों के लिए प्रशिक्षित किया गया। कार्यक्रम की अगुवाई जिला बाल संरक्षण इकाई (DCPU) ने की, जबकि सहयोग में नागरिक समाज संगठनों शक्ति वाहिनी और एमडीडी ऑफ इंडिया की भूमिका अहम रही।

30 में से 28 सरपंचों ने लिया हिस्सा
फरीदाबाद ब्लॉक के 30 में से 28 गांवों के सरपंच इस प्रशिक्षण शिविर में शामिल हुए। कार्यक्रम की मुख्य वक्ता मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) ऋतु यादव रहीं। उन्होंने कहा कि “डीएलएसए गांव-गांव में बच्चों के लिए सुरक्षा तंत्र खड़ा करने को प्रतिबद्ध है और हर स्तर पर कानूनी मदद के लिए तैयार है।”

उन्होंने यह भी बताया कि जिला विधिक सेवा प्राधिकरण न केवल बाल विवाह और बाल श्रम की रोकथाम में सक्रिय है, बल्कि पॉक्सो जैसे संवेदनशील मामलों में भी पीड़ित बच्चों को मुफ्त कानूनी सहायता मुहैया करा रहा है।

“सरपंचों के बिना बाल सुरक्षा अधूरी” – गरिमा सिंह तोमर

जिला बाल कल्याण संरक्षण अधिकारी गरिमा सिंह तोमर ने सरपंचों से संवाद करते हुए कहा कि अब वक्त है कि ग्राम स्तरीय बाल सुरक्षा समितियों को और अधिक सशक्त किया जाए। “गांवों में हो रहे किसी भी तरह के बाल अधिकार हनन के मामलों पर अब त्वरित कार्रवाई जरूरी है। इसके लिए सरपंचों को ट्रेनिंग देना एक बड़ा कदम है।”

CMPओ हेमा कौशिक का निर्देश – रखें रिकॉर्ड, तुरंत करें सूचना साझा

बाल विवाह प्रतिषेध अधिकारी हेमा कौशिक ने सरपंचों से आग्रह किया कि वे हर बैठक का विवरण एक रजिस्टर में दर्ज करें और यदि कहीं भी बाल विवाह, बाल श्रम या शोषण की सूचना मिले तो प्रशासन और सहयोगी संगठनों को तुरंत जानकारी दें। शिविर में सभी सरपंचों को शक्ति वाहिनी और एमडीडी के संपर्क नंबर भी उपलब्ध कराए गए।

नागरिक संगठनों की मांग पर हुआ प्रशिक्षण शिविर

बता दें कि यह शिविर नागरिक समाज संगठनों शक्ति वाहिनी और एमडीडी ऑफ इंडिया की मांग पर आयोजित किया गया। दोनों संगठन जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन (JRC) जैसे राष्ट्रीय बाल अधिकार मंच के सक्रिय सदस्य हैं। इन संगठनों ने उपायुक्त को पत्र लिखकर ग्राम स्तर पर सरपंचों को प्रशिक्षण देने की मांग की थी, जिस पर उपायुक्त विक्रम सिंह ने सभी संबंधित विभागों को शिविर में उपस्थित रहने के निर्देश दिए थे।

“सरपंचों के सहयोग से गांवों में बनेगा बाल सुरक्षा कवच” – दीपक भाटी

एमडीडी ऑफ इंडिया के जिला समन्वयक दीपक भाटी ने कहा कि यह केवल एक शुरुआत है। “हम गांव-गांव जाएंगे, सरपंचों के साथ मिलकर बाल सुरक्षा समितियों को सक्रिय बनाएंगे ताकि बच्चों का बचपन सुरक्षित रह सके।”

“बाल अधिकारों की रक्षा की नींव गांवों से रखनी होगी” – निशिकांत

सामाजिक कार्यकर्ता निशिकांत ने कहा कि इस प्रशिक्षण शिविर की सबसे बड़ी उपलब्धि यह है कि सरपंचों को अब उनके कानूनी और सामाजिक दायित्वों की जानकारी है। “बाल अधिकारों की रक्षा तभी संभव है जब उसकी निगरानी गांव के स्तर पर हो। सरपंच ही असली प्रहरी हैं।”

प्रमुख बिंदु:

  • जिले के 28 सरपंचों को दिया गया बाल सुरक्षा का प्रशिक्षण
  • डीएलएसए, डीसीपीयू, शक्ति वाहिनी और एमडीडी ने निभाई मुख्य भूमिका
  • सरपंचों को दिए गए रजिस्टर व हेल्पलाइन नंबर
  • बाल विवाह, बाल श्रम व यौन उत्पीड़न की सूचना तत्काल साझा करने पर जोर
  • अन्य ब्लॉकों में भी जल्द होंगे ऐसे शिविर


No comments