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महापौर एजाज ढेबर ने कहा - एमआइसी ने विज्ञापन की नई पालिसी बनाने का फैसला लिया

रायपुर। रायपुर नगर निगम में 50 करोड़ का यूनिपोल घोटाला उजागर करने वाले महापौर एजाज ढेबर ने कहा है कि एमआइसी ने विज्ञापन की नई पालिसी बनाने क...

रायपुर। रायपुर नगर निगम में 50 करोड़ का यूनिपोल घोटाला उजागर करने वाले महापौर एजाज ढेबर ने कहा है कि एमआइसी ने विज्ञापन की नई पालिसी बनाने का फैसला लिया है। जिन ऐड एजेंसियों ने साइज से अधिक होर्डिंग, यूनिपोल लगाकर निगम के राजस्व को नुकसान पहुंचाया है, उसे पहले तो निर्धारित साइज में कराया जायेगा। उसके बाद नुकसान हुए राजस्व की गणना कर पेनल्टी ठोंककर सख्ती से राशि की वसूली की जायेगी। शहर के विभिन्न चौक-चौराहे, मार्गों पर बेतरतीब ढंग से लगे दैत्यकार यूनिपोल, होर्डिंग के कारण हमेशा हादसे का खतरा बना रहता है। किसी की जान खतरे में न रहे इसे ध्यान में रखकर जल्द ही ऐसे यूनिपोल, होर्डिंग बोर्ड को चिन्हांकित कर हटाने की कार्रवाई शुरू करेंगे। यही नहीं चौक-चौराहे पर लगे मोबाइल यूनिट को भी हटाएंगे। दरअसल, महापौर एजाज ढेबर पत्रकारों से चर्चा कर रहे थे। उन्होंने बताया कि एमआइसी की बैठक में एक घंटे तक विज्ञापन की नई पालिसी पर सदस्यों के साथ चर्चा की गई है। देखने में आया है कि मुख्य बाजार, सड़क की दुकानों पर विभिन्न कंपनियों के होर्डिंग, ग्लो साइन बोर्ड लगे हुए है। ऐसे बोर्ड को नई विज्ञापन पालिसी के दायरे में लिया जाएगा। शहर में लगे कई यूनिपोल की निर्धारित साइज 15 बाई नौ की अनुमति निगम से ली गई लेकिन ऐड एजेंसियों ने मनमाने तरीके से साइज को 15 बाई 18 कर लिया। बढ़ाए गए साइज को हमने यथावत करने के निर्देश अधिकारियों को दिए है। एमआइसी सदस्य श्रीकुमार मेनन और सहायक अभियंता निशिकांत वर्मा इसकी मानिटरिंग करेंगे। महापौर एजाज ढेबर ने बताया कि एक चिट्ठी से यूनिपोल घोटाला उजागर हुआ।यह चिट्ठी लाभचंद जैन ने 23 जनवरी 2023 को मुझे लिखी थी।इस चिट्ठी को महापौर ने मीडिया के सामने सार्वजिनक किया।चिट्ठी में लिखा है कि मैं आपका ध्यान निगम के अधिकारियों द्वारा किए जा रहे बहुत बड़े होर्डिंग विज्ञापन घपले पर दिलाना चाहता हूं। मैं पिछले 15 वर्षों से नगर निगम में विज्ञापन के कार्य से जुड़ा हूं। हम लोगों को हमेशा कार्य मिलता रहता था लेकिन पिछले चार-पांच साल से केवल पांच से सात ऐड एजेंसियों के दवाब में नगर निगम कार्य दे रहा है। यहां के कुछ अधिकारी इन बड़ी एजेंसियों की मदद करते हैं। आज केवल एएसएस, राघव, व्यापक, ग्रेसफुल, देशकर इन्‍हीं एजेंसियों को अधिकारी मिलीभगत कर टेंडर दे रहे हैं और हमसे राय भी नहीं ली जाती। पत्र में आगे बताया गया कि वर्ष 2017 से 2018 के बीच जब प्रमोद दुबे महापौर थे,तब से यह खेल शुरू हुआ है। पत्र में लाभचंद जैन ने आगे लिखा है कि निगम के अधिकारी टेंडर का रेट बढ़ाकर छोटे ऐड एजेंसियों को बाहर कर देते थे। बस स्टाप वाले टेंडर में एएसए को मनमुताबिक रेट और कम पैसे में करोड़ों का काम दे दिया गया जबकि कई एजेंसियां वही काम कर सकते थे। मेंट्री पोल में कोर्ट से स्टे लेकर भी एएसए को भाजपा नेता विनोद अग्रवाल अभी तक टेंडर लेते आ रहे है।यह सब अधिकारियों की मिलीभगत से हो रहा है।कोई कोर्ट से स्टे लेकर कैसे करोड़ों का काम ले सकता है? यहीं नही विनोद अग्रवाल के कई टेंडर फर्जी कंपनियों के नाम से मिले है।इसकी जांच कराकर टेंडर रद करें ताकि नए टेंडर में सभी को काम करने का मौका मिल सके। पत्र में आरोप लगाया गया है कि यूनिपोल लगाने का टेंडर ग्रेसफुल एजेंसी को बिना टेंडर दे दिया जाता है।इससे निगम को 25 करोड़ का नुकसान हुआ है। ये लोग विपक्ष से जुड़े है। उसके बाद भी उन्हें यूनिपोल और सुलभ शौचालय के उपर होर्डिंग लगाने का काम दिया जा रहा है। वर्तमान में एएसए, राघव, ग्रेसफुल आदि बड़ी ऐड कंपनियों पर निगम का करोड़ों रुपए बकाया है, फिर भी उन्हीं को काम दिया जा रहा है। जबकि कोरोना काल में छोटी एजेंसियों ने अपने शुल्क माफ करने के लिए पत्र लिखा था जिस पर ध्यान नहीं दिया गया उल्टे काम देना बंद कर दिया गया। यूनिपोल के काम, बस स्टापेज और स्मार्ट टायलेट का टेंडर पुन: करने से निगम को 25 से 50 करोड़ की अतिरिक्त आमदनी होगी। 

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