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पिछड़े वर्गों को 27% आरक्षण देने वाले विधेयक का ओबीसी संयोजन समिति छ.ग. ने किया स्वागत: शत्रुहन सिंह

धमतरी। अखिल भारतीय पिछड़ा वर्ग संघ के राष्ट्रीय महासचिव एवं ओबीसी संयोजन समिति छ.ग. के संस्थापक अधिवक्ता शत्रुहन सिंह साहू ने प्रेस विज्ञप्त...


धमतरी। अखिल भारतीय पिछड़ा वर्ग संघ के राष्ट्रीय महासचिव एवं ओबीसी संयोजन समिति छ.ग. के संस्थापक अधिवक्ता शत्रुहन सिंह साहू ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर  2 दिसंबर को विधान सभा के विशेष सत्र में पिछड़े वर्गों को पूर्व निर्धारित 27 %, अनुसूचित जनजाति को 32%, अनुसूचित जाति को 13%एवम ई डब्लू एस को 4% आरक्षण देने के लिए भूपेश सरकार  द्वारा सर्वसम्मति से पारित विधेयक का स्वागत करते हुए कहा कि प्रदेश में ओ.बी.सी. संयोजन समिति छत्तीसगढ़ के द्वारा चलाई जा रही ओबीसी जागरूकता अभियान का ही परिणाम है कि प्रदेश सरकार द्वारा पिछड़े वर्गों के लिए पूर्व प्रावधानित 27% देने का फैसला लिया गया है जो 20 नवंबर 2022 को आयोजित  पिछड़े वर्गों के राष्ट्रीय अधिवेशन एवम 26 जून के राज्य स्तरीय सम्मेलन में पारित प्रस्ताव का सम्मान है।  पिछड़े वर्गों के राष्ट्रीय अधिवेशन में ओबीसी सुरक्षा अधिनियम, पूर्व प्रावधानित 27% आरक्षण को तत्काल लागू कर अन्य पिछड़े वर्गों को भी जनसंख्या के अनुपात में समान प्रतिनिधित्व दिए जाने, देशभर में जातिवार जनगणना करवाने सहित 5 सूत्री प्रस्ताव पारित कर माननीय मुख्यमंत्री महोदय छत्तीसगढ़ एवम माननीय प्रधानमन्त्री महोदय भारत सरकार को सौंपकर उस पर त्वरित कार्यवाही की मांग की गई थी  जिस पर भूपेश सरकार द्वारा संज्ञान लेते हुए विधान सभा के विशेष सत्र में छत्तीसगढ़ के पिछड़े वर्गों को भी 27% आरक्षण देने वाली विधेयक को कानूनी मान्यता देकर भूपेश सरकार ने ओबीसी की उत्थान और कल्याण के कार्य को दिशा देने का काम किया है जिसका ओबीसी संयोजन समिति छत्तीसगढ़ ने स्वागत करते हुए शीघ्र क्रियान्वयन की अपील के साथ राज्य सरकार का आभार व्यक्त किया है सरकार के युक्त फैसले से पिछड़े वर्गों के लोग काफी उत्साहित है लेकिन ओबीसी संयोजन समिति छत्तीसगढ़ के द्वारा जारी आजादी की दूसरी संघर्ष ओबीसी जन जागरण महा अभियान तब तक चलता रहेगा जब तक ओबीसी समाज को जनसंख्या के अनुपात में सभी क्षेत्रों में चाहे वह न्यायपालिका विधायिका कार्यपालिका मीडिया व्यापार उद्योग शिक्षा नौकरी पदोन्नति व सभी निजी व सार्वजनिक क्षेत्रों में जनसंख्या के अनुपात में समान हिस्सेदारी ना मिल जाए इसके लिए हम हर कुर्बानी देने को तैयार हैं।

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