2020 में 9, 2025 में 5 विकासखंड थे क्रिटिकल; 2026 में संख्या शून्य, भूजल रिचार्ज भी रिकॉर्ड 14.65 बीसीएम रायपुर। जल संरक्षण और भूजल प्रबं...
2020 में 9, 2025 में 5 विकासखंड थे क्रिटिकल; 2026 में संख्या शून्य, भूजल रिचार्ज भी रिकॉर्ड 14.65 बीसीएम
रायपुर। जल संरक्षण और भूजल प्रबंधन के क्षेत्र में छत्तीसगढ़ ने बड़ी उपलब्धि हासिल की है। भूजल संसाधन आकलन-2026 में प्रदेश का एक भी विकासखंड भूजल दोहन की ‘क्रिटिकल’ श्रेणी में नहीं है। वर्ष 2020 में प्रदेश के 9 विकासखंड इस श्रेणी में थे, जो 2025 में घटकर 5 रह गए थे। अब ये सभी पांच विकासखंड भी क्रिटिकल श्रेणी से बाहर आ गए हैं।
आकलन में 12 विकासखंडों की भूजल श्रेणी में सुधार हुआ है, जबकि किसी भी विकासखंड की स्थिति खराब नहीं हुई। विकासखंडवार भूजल आकलन शुरू होने के बाद यह प्रदेश का अब तक का सबसे बड़ा एक-चक्रीय सुधार माना जा रहा है। सुरक्षित श्रेणी वाले विकासखंडों की संख्या बढ़कर 127 हो गई है।
भूजल रिचार्ज रिकॉर्ड स्तर पर
केंद्रीय भूमि जल बोर्ड और राज्य भूजल सर्वेक्षण मंडल के संयुक्त आकलन के अनुसार प्रदेश में वार्षिक भूजल रिचार्ज बढ़कर 14.65 बिलियन घन मीटर (बीसीएम) पहुंच गया है, जो अब तक का सर्वोच्च स्तर है। वर्ष 2017 में यह 11.57 बीसीएम था।
वर्ष 2020 की तुलना में तालाबों और पोखरों से होने वाले भूजल रिचार्ज में 266.9 प्रतिशत, जबकि अन्य जल संरक्षण संरचनाओं से रिचार्ज में 202.8 प्रतिशत वृद्धि दर्ज की गई है। वर्ष 2026 के आकलन में प्रदेशभर में 2 लाख 28 हजार 736 जल संरचनाएं दर्ज की गई हैं।
पहली बार भूजल दोहन में भी कमी
इस बार की उपलब्धि का एक महत्वपूर्ण पहलू भूजल दोहन में आई गिरावट है। वर्ष 2026 में कुल भूजल दोहन 6.21 बीसीएम रहा, जबकि पिछले आकलन चक्र में यह 6.30 बीसीएम था। उपलब्ध रिकॉर्ड में यह पहली वार्षिक गिरावट है।
वर्ष 2022 में भूजल दोहन का स्तर 49.5 प्रतिशत तक पहुंच गया था, जो अब घटकर 46.37 प्रतिशत रह गया है। यह 70 प्रतिशत की सुरक्षित सीमा से काफी नीचे है। अधिकारियों के अनुसार फसल विविधीकरण, जल संरक्षण, भूजल पुनर्भरण और पानी की मांग के बेहतर प्रबंधन का इसका सीधा असर पड़ा है।
बेमेतरा-राजनांदगांव में फसल बदलाव का असर
भूजल दोहन घटाने में गर्मी के धान के रकबे में कमी को अहम कारण माना गया है। बेमेतरा में गर्मी के धान का रकबा करीब 26 हजार से घटकर 5 हजार हेक्टेयर और राजनांदगांव में 9,400 से घटकर करीब 2,800 हेक्टेयर रह गया। दोनों जिलों में मिलाकर करीब 27,600 हेक्टेयर रकबा कम हुआ।
बेमेतरा लगातार चार आकलन चक्रों के बाद क्रिटिकल श्रेणी से बाहर आया है। जिले में वर्ष 2023 की तुलना में कुल भूजल दोहन में करीब 20 प्रतिशत कमी दर्ज हुई है। राजनांदगांव में वर्ष 2022 में 70.5 प्रतिशत रहा भूजल दोहन अब सुरक्षित श्रेणी में आ गया है। यहां सिंचाई के लिए भूजल दोहन में वर्ष 2023 की तुलना में 16.4 प्रतिशत कमी आई है।
2030 तक सभी विकासखंड सुरक्षित बनाने का लक्ष्य
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने उपलब्धि का श्रेय किसानों, नागरिकों और मैदानी अमले को देते हुए कहा कि यह केवल सरकारी नीतियों का परिणाम नहीं, बल्कि जनभागीदारी और सामूहिक संकल्प का परिणाम है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘जन शक्ति से जल शक्ति’ के आह्वान और ‘जल संचय जन भागीदारी’ अभियान को छत्तीसगढ़ ने गांवों और खेतों तक पहुंचाया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि अब प्रदेश के 11 जिलों के 19 अर्ध-संकटग्रस्त विकासखंडों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। लक्ष्य है कि वर्ष 2030 तक प्रदेश का कोई भी विकासखंड भूजल तनावग्रस्त न रहे।
इसके लिए जल संरक्षण, भूजल पुनर्भरण और फसल विविधीकरण पर जोर दिया जाएगा। वर्ष 2026-27 में बेमेतरा, बिलासपुर और जांजगीर-चांपा के करीब 5,442 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में एनएक्यूआईएम 2.0 के तहत जलभृत मानचित्रण अध्ययन प्रस्तावित है। इससे क्षेत्रवार भूजल उपलब्धता और प्रबंधन की जरूरतों का वैज्ञानिक आकलन किया जा सकेगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जल संरक्षण का यह अभियान आने वाली पीढ़ियों की जल सुरक्षा से जुड़ा है। क्रिटिकल विकासखंडों की संख्या शून्य तक पहुंचाना महत्वपूर्ण पड़ाव है और अब इसी जनभागीदारी के आधार पर प्रदेश के प्रत्येक विकासखंड को सुरक्षित बनाने की दिशा में काम जारी रहेगा।

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