चिंतलनार की पुनर्वासित बेटियों ने हथकरघा परिधानों में किया रैंप वॉक, मुख्यमंत्री साय और विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने बढ़ाया हौसला रायप...
चिंतलनार की पुनर्वासित बेटियों ने हथकरघा परिधानों में किया रैंप वॉक, मुख्यमंत्री साय और विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने बढ़ाया हौसला
रायपुर। छत्तीसगढ़ में सुशासन और पुनर्वास की नई तस्वीर शनिवार को राजधानी रायपुर में देखने को मिली। पंडित दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम में आयोजित राष्ट्रीय हथकरघा दिवस समारोह में सुकमा के चिंतलनार की पुनर्वासित बेटियों ने पहली बार राजधानी के बड़े मंच पर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। ग्रामोद्योग विभाग की पहल पर आयोजित फैशन शो में इन बेटियों ने मिस इंडिया ईस्ट अनुष्का सोन के साथ छत्तीसगढ़ के पारंपरिक हथकरघा परिधानों में रैंप वॉक किया।
रैंप पर आत्मविश्वास के साथ कदम बढ़ाती इन बेटियों ने यह संदेश दिया कि सही अवसर और सम्मान मिले तो कभी हिंसा और भय के साए में रही जिंदगी भी नई उम्मीद और आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ सकती है। यह आयोजन महज फैशन शो नहीं, बल्कि हिंसा से विकास, भय से विश्वास और भटके हुए जीवन से सम्मानजनक भविष्य की ओर बढ़ते नए छत्तीसगढ़ की तस्वीर बन गया।
इस अवसर पर चिंतलनार की पुनर्वासित बेटियां श्रीमती पुनेम देवे, श्रीमती माड़वी देवे, श्रीमती माड़वी माल्ले, श्रीमती मिडियम गांगी, कुमारी माड़वी नान्दनी, कुमारी डोंडी रामे, कुमारी माड़काम भीमे, कुमारी पोड़ियाम राजे, कुमारी पुनेम ज्योति और कुमारी हिड़मे मारकाम ने रैंप वॉक में हिस्सा लिया।
राजधानी के मंच पर पहली बार मिला अवसर
छत्तीसगढ़ में यह पहला अवसर था, जब ग्रामोद्योग विभाग की पहल पर सुकमा के चिंतलनार की पुनर्वासित बेटियों को राजधानी रायपुर के इतने बड़े मंच पर अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिला। पारंपरिक हथकरघा परिधानों में सजी इन बेटियों ने न केवल छत्तीसगढ़ की समृद्ध बुनकरी परंपरा को प्रदर्शित किया, बल्कि पुनर्वास के बाद उनके जीवन में आए बदलाव को भी सामने रखा।
मुख्यमंत्री और विधानसभा अध्यक्ष ने बढ़ाया हौसला
पुनर्वासित बेटियों के आत्मविश्वास और प्रस्तुति से मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय और विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह भी गदगद नजर आए। दोनों ने मंच पर पहुंचकर बेटियों से मुलाकात की और उनका उत्साह बढ़ाया। उन्होंने इस पहल की सराहना करते हुए इसे बदलाव और सशक्तिकरण की प्रेरक मिसाल बताया।
इस पूरे आयोजन ने यह संदेश दिया कि सरकार की पुनर्वास नीति का उद्देश्य केवल मुख्यधारा में वापस लाना नहीं, बल्कि पुनर्वासित लोगों को सम्मान, पहचान, आत्मविश्वास और अपनी प्रतिभा को आगे बढ़ाने का अवसर देना भी है। चिंतलनार की बेटियों का यह रैंप वॉक इसी बदलते छत्तीसगढ़ की एक सशक्त तस्वीर बनकर सामने आया।


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