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ग्राम पूटाडांड में मनरेगा अंतर्गत सामुदायिक सहभागिता से बदली विकास की दिशा

   जलभराव क्षेत्र निर्माण कार्य ने ग्रामीणों के जीवन में हुआ उल्लेखनीय परिवर्तन रायपुर। मनेन्द्रगढ़-भरतपुर-चिरमिरी जिले के ग्राम पंचायत मुस...

  

जलभराव क्षेत्र निर्माण कार्य ने ग्रामीणों के जीवन में हुआ उल्लेखनीय परिवर्तन

रायपुर। मनेन्द्रगढ़-भरतपुर-चिरमिरी जिले के ग्राम पंचायत मुसरा के ग्राम पूटाडांड में मनरेगा अंतर्गत किए गए सामुदायिक जलभराव क्षेत्र निर्माण कार्य ने ग्रामीणों के जीवन में उल्लेखनीय परिवर्तन लाया है। लंबे समय से यहां के किसान वर्षा-आधारित खेती पर निर्भर थे और पानी की कमी, पथरीली भूमि तथा अनियमित वर्षा के कारण उनकी फसल उत्पादन क्षमता लगातार प्रभावित हो रही थी। खेती की अनिश्चितता के चलते ग्रामीणों की आजीविका भी चुनौतीपूर्ण होती जा रही थी।

ग्राम सभा की पहल समुदाय की मांग से शुरू हुई विकास की दिशा
    गांव के किसानों और ग्रामीणों की लगातार मांग पर ग्राम सभा ने इस कार्य को प्राथमिकता दी और प्रस्ताव स्वीकृति के लिए भेजा। तकनीकी परीक्षण और योजना निर्माण के बाद ग्राम पंचायत मुसरा द्वारा 8.49 लाख रुपये की लागत से जलभराव क्षेत्र का निर्माण कराया गया। इस संरचना ने गांव में जल संरक्षण का नया द्वार खोला-खेतों तक पानी पहुँचने लगा, फसल उत्पादन में सुधार हुआ और ग्रामीणों के बीच आजीविका के प्रति नया भरोसा विकसित हुआ।

जल-संरक्षण से समृद्धि की ओर-किसानों के जीवन में नई उम्मीद, खेतों में नई हरियाली
    परियोजना पूर्ण होने के बाद ग्राम पूटाडांड के किसानों ने पहली बार लगभग 7 एकड़ भूमि में उत्कृष्ट धान उत्पादन प्राप्त किया। संरक्षित जल ने खरीफ फसल को समय पर सिंचाई उपलब्ध कराई, जिससे उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि हुई। पहले जहाँ किसान सिंचाई के अभाव में फसल बचाने के लिए चिंतित रहते थे, वहीं अब वे आत्मविश्वास के साथ रबी फसल की भी तैयारी कर रहे हैं। गांव में कृषि गतिविधियों की निरंतरता बढ़ी है और खेती अब अधिक टिकाऊ एवं लाभदायक बनी है।

समुदाय के लिए बहुउपयोगी जल संसाधन
    यह जलभराव संरचना सिर्फ खेती तक सीमित नहीं रही- ग्रामीणों के पशुधन के लिए पेयजल उपलब्ध हो रहा है। गर्मी के दिनों में जल संकट काफी हद तक कम हुआ है। खेतों में नमी टिकने से भूमि की गुणवत्ता में भी सुधार हुआ है। मनरेगा के माध्यम से निर्माण चरण में स्थानीय रोजगार भी सुनिश्चित हुआ। इससे ग्राम में कृषि उत्पादकता, आजीविका सुरक्षा और सामाजिक सहयोग तीनों में सकारात्मक परिवर्तन दिखाई दे रहा है।

पूटाडांड-विकास और आत्मनिर्भरता की मिसाल
    सामुदायिक निर्णय, सामूहिक श्रम और योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन ने यह सिद्ध कर दिया कि जब गांव स्वयं विकास की बागडोर संभालता है, तो परिणाम न सिर्फ स्थायी होते हैं बल्कि दूरगामी भी। मनरेगा अंतर्गत निर्मित यह जलभराव संरचना आज ग्राम पूटाडांड की- उन्नत कृषि, बेहतर सिंचाई, रोजगार सृजन और आजीविका संवर्धन की सशक्त मिसाल बन चुकी है।

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