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भारतीय त्योहार विश्व के लिए शांति सद्भाव एवम भाईचारे का संदेश देती है : राम बालक दास जी

abernews। प्रतिदिन की भांति ऑनलाइन सत्संग का आयोजन संत श्री राम बालक दास जी के द्वारा उनके विभिन्न व्हाट्सएप ग्रुप में आज भी किया गया जिसमें...


abernews। प्रतिदिन की भांति ऑनलाइन सत्संग का आयोजन संत श्री राम बालक दास जी के द्वारा उनके विभिन्न व्हाट्सएप ग्रुप में आज भी किया गया जिसमें भक्तगण  जुड़ कर विभिन्न धार्मिक समसामयिक विषयों पर अपनी जिज्ञासाओं का समाधान प्राप्त किये

  आज  उमाशंकर जी बीकानेर ने जिज्ञासा रखी थी भारतीय पर्व और त्योहारों का हमारे जीवन में क्या महत्व है महाराज जी इस पर प्रकाश डालें, संत श्री ने पर्व और त्यौहार का महत्व बताते हुए कहा कि भारतवर्ष में हमारे प्राचीन ऋषि-मुनियों की सोच हमारी सभ्यता और संस्कृति का घोतक यह पर्व त्यौहार हर वर्ष के हर माह में हमारे साथ होते हैं क्योंकि हमारा जीवन ही त्यौहार हैँ जिसमें हम दूसरों की खुशियों का पूरा ध्यान रखते हैं, दूसरों को सम्मान देना हमारी सभ्यता है कहीं माता की पूजा है तो कहीं पिता की तो किसी पर्व में माता-पिता दोनों की पूजा है कहीं हमारे घर में फैली समृद्धि की पूजा करते हैं तो किसी त्योहार में हरियाली की पूजा करते तो कहीं खेत खलियान की तो कहीं अस्त्र और शास्त्र की पूजा करते हैं तो कहीं हम हमारे बैल नाग गाय की पूजा करते हैं इस तरह से हमारे त्यौहार हर तरह के जीव जगत हो या  व्यक्ति समाज सभी को सम्मान देते हैं गुरु पूर्णिमा जैसे पर्व पर हम हमारे सर्वोपरि गुरु की आराधना पूजा करके हम उन्हें सम्मान देते हैं हमारे तीज त्यौहार हमारी घर की साफ-सफाई से लेकर हमारे घर की संपत्ति तक को अपने में समाहित किए हुए हैं जिसे हम पूजा का मान सम्मान देकर अपने घर की सुख संपत्ति की कामना भी करते हैं और घर का वातावरण भी स्वच्छ बनाए रखते हैं  और हमारे भारतवर्ष में यही सभ्यता संस्कृति है कि हम इस समारोह में दूसरों की खुशियों का ध्यान रखें, होलिका दहन करके वायु दोष को दूर करते हैं तो रावण का वध करके नारी  की रक्षा में श्री राम  के पर्व को मनाते हैं और माता दुर्गा की स्थापना कर उनकी पूजा आराधना कर नारी का सम्मान करते हैं, दीपावली महोत्सव मनाकर सारे जग की अंधकार को दूर करते हैं, अतः यदि हमारे जीवन में यह पर्व त्यौहार ना हो तो हमारा जीवन ही शमशान सा हो जाएगा, जीवन में उदासी ओर नकारात्मक सोच लाने वाले हर बुराइयों का नाश करने वाला तीज त्यौहार ही है इसलिए सभी प्यार से और भाईचारे से इन त्यौहारओ को अवश्य रुप में मनाए

               रामफ़ल जी ने जिज्ञासा रखी की कृष्ण पक्ष चेत्र मास को धुर पक्ष क्यों कहते हैं बाबा जी ने बताया कि क्योंकि होली के बाद हमारे भारतवर्ष में ग्रीष्म ऋतु का आरंभ हो जाता है और जिससे वातावरण अचानक परिवर्तित होता है और तेज हवाएं चलती है और जिस में धूल आदि कण तूफान के रूप में उड़ते हैं, इसलिए इस पक्ष में हमारे धर्म में या विधान रखा है कि कोई भी बड़ा आयोजन नहीं किया जाता लेकिन अब यह परंपराएं बदल रही हैं

              सतरराम मंडावी ने जिज्ञासा रखि कि यज्ञ कुंड  की परिक्रमा करने का क्या विधान है बाबा जी ने बताया कि यज्ञ की परिक्रमा करते समय कुछ विशेष बातों का ध्यान रखना होता है जैसे यज्ञ में जाते समय पुरुष वर्ग धोती स्त्री वर्गों को भारतीय परिधान पहन कर जाना चाहिए एवं जब परिक्रमा करे तो यह निश्चित कर ले के चावल तुलसी पत्र फूल एक निश्चित स्थान पर ही चढ़ाएं ताकि वह किसी के पैर में ना आए ऐसा अगर होता है तो चढ़ाने वाले को और जिसके पैर में वह आएगा दोनों को ही दोष लगता है, वैसे भी चावल कभी भी किसी भी मंदिर में भगवान के विग्रह पर चढ़ाना ही नहीं चाहिए, क्योंकि पीला चावल पूजा में तो सफेद चावल शिवजी के अभिषेक में ही प्रयोग होता है इसके अलावा कहीं भी चावल चढ़ाना पूरी तरह से अंधविश्वास है, हमारे घर के परिवार जनों को विशेषकर माताओं को यह बात बताना बहुत आवश्यक है कि यदि उन्हें चावल चढ़ाना है तो एक मुट्ठी चावल ले जाए और जहां भंडारा होता हो या भोजन प्रसादी बन रहा हो वहां जाकर उसे दान दे या फिर एक बर्तन में चढ़ा दे इस तरह से अन्यत्र यहां वहां डालकर अन्न का अपमान ना करें।

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