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अफसरों और जनपद सदस्यों के बीच नहीं थम रहा गतिरोध-बैठक में नहीं हुए मौजूद

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कटघोरा । पंचायती राज व्यवस्था में जहां अफसरों और जनप्रतिनिधियों को एक-दूसरे का पूरक समझा जाता है। इनके आपसी सामंजस्य से जहां पंचायतों में विकास के कार्यों को गति मिलती है और ग्रामीण अर्थव्यवस्था सुदृढ होती है तो वहीं कटघोरा जनपद में इसके उलट होता दिखाई पड़ रहा है। अधिकारी और जनप्रतिनिधि एक दूसरे के सहभागी होने के बजाए प्रतिस्पर्धा में जुटे हैं, जिसका खामियाजा पंचायत के रहवासियों को भुगतना पड़ रहा है। इसे अफसरों की अकड़ कहे या कुछ और लेकिन यह सच है कि वे जनप्रतिनिधियों को जरा भी भाव नहीं दे रहे हैं। यही वजह है कि चुने गए सदस्य जब कभी किसी तरह के सभा का आयोजन करते हैं तो अफसर ऐसी सभाओं में अपनी उपस्थिति तक दर्ज कराना जरूरी नहीं समझते। इसी तरह हालात आज कटघोरा जनपद पंचायत में निर्मित हुए जहां सामान्य सभा की बैठक में 40 प्रतिशत अफसर भी मौजूद नहीं थे लिहाजा इस उपेक्षा से नाराज जनपद अध्यक्ष, उपाध्यक्ष व सदस्यों ने बैठक ही रद्द कर दी। मीडिया से हुई बातचीत में उन्होंने जनपद पंचायत कटघोरा के मुख्य कार्यपालन व दूसरे अधिकारियों को जमकर आड़े हाथ लिया। नाराज सदस्यों ने कहा कि अपने भ्रष्टाचार को छिपाने वे अक्सर बैठकों में नहीं पहुंचते। ये ना सिर्फ उनका अपमान है बल्कि समूचे पंचायती राज व्यवस्था को ठेंगा दिखाने जैसा है। सदस्यों ने इसकी शिकायत कलेक्टर व जिला पंचायत सीईओ से करने की बात कही है। दरअसल कटघोरा जनपद पंचायत अध्यक्ष लता कंवर की अगुवाई में जनपद परिसर में सामान्य सभा की बैठक आयोजित की गई थी। बैठक में हिस्सा लेने सभी क्षेत्र के जनपद सदस्य उपस्थित थे। सामान्य सभा की सूचना सम्बंधित 21 विभागों के प्रमुखों को भी दी गई थी बावजूद 21 में से महज 7 विभागों के अधिकारी जनपद पंचायत पहुंचे थे। समय के बाद भी जब अधिकारी उपस्थित नहीं हुए तो नाराज सदस्यों ने बैठक रद्द कर दी।
नाराज जनपद अध्यक्ष लता कंवर ने बताया कि अफसरों के द्वारा बैठकों की यह अनदेखी पहली बार नहीं है। पहले भी जब जनरल मीटिंग रखी जाती थी तो जवाब देने की अपनी जिम्मेदारियों से बचने अफसर बैठकों में नहीं पहुंचते थे। यह ना सिर्फ उनका बल्कि पूरी व्यवस्था का अपमान है। वे जनता के द्वारा चुने गए लोग हैं। उन्हें पंचायतों में कार्यों को लेकर जवाब देना होता है। इससे उन्हें कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है। जनपद उपाध्यक्ष रामप्रसाद कोर्राम ने बताया कि बैठक की सूचना सीईओ को भी दी गई थी। उन्हें चाहिए था कि वे सभी विभागों के प्रमुखों को पूर्व सूचना देते और बैठक में आमंत्रित करते लेकिन वे अब जब बैठक की शुरुआत हुई है कह रहे कि सबको फोन किया जाएगा। यह सीईओ का जनप्रतिनिधियों के प्रति असहयोगी रवैय्या समझ से परे है। वे उच्चाधिकारियों से इसकी कड़ी शिकायत करेंगे। दूसरी तरफ मीडिया ने जनपद सीईओ एचएन खूंटेल से भी इस मामले पर चर्चा की।
उन्होंने बताया कि सूचना के बावजूद ज्यादातर अधिकारियों ने बैठक में शामिल होने में रुचि नहीं दिखाई. बैठक में उपस्थित रहने वाले अफसरों में लोकस्वास्थ्य यांत्रिकी, जल संसाधन व ग्रामीण अभियांत्रिकी विभाग के प्रमुख ही शामिल हुए। उन्होंने अनुपस्थित अफसरों को नोटिस भेजे जाने की बात कही है। सामान्य सभा में पहुंचे जनपद सदस्यों में अध्यक्ष लता कंवर, उपाध्यक्ष गोविंद सिंह कंवर, सदस्य रामप्रसाद कोर्राम, रूपसिंह विंध्यराज, राधिका साहू, बैसाखू यादव, कान्ती दीवान, संगीता बेलदार, शत्रुघन राज, सावित्री कंवर, प्रभा सिंह कंवर, शैलबाई कंवर, ममता राठौर व गिरिजा बाई बिंझवार मौजूद रही।

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